लखनऊ – राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में 10000 से अधिक पदों की विज्ञप्ति दिनांक 15 दिसम्बर को जारी हुई, जिसमें व्याप्त अनेक कमियों पर ध्यान आकृष्ट करते हुए राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ ने मानदेय का निर्धारण स्थाई पदों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते को जोड़कर किये जाने की मांग की है । महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि विज्ञापन में अनेक कमियां हैं । फार्मेसिस्ट की अनिवार्य योग्यता में नर्सिंग कौंसिल में पंजीकरण मांगा गया है जबकि फार्मेसिस्ट का पंजीकरण स्टेट फार्मेसी कौंसिल में होता है । वहीं बैचलर फार्मेसिस्ट का मानदेय डिप्लोमा फार्मेसिस्ट से कम रखा गया है । दस हजार से अधिक रिक्तियों में कुल 22 डिप्लोमा होल्डर फार्मेसिस्ट और 17 बैचलर फार्मेसिस्ट(बी फार्म) की रिक्तियां विज्ञापित की गई हैं, जो अत्यंत कम है ।
RNTCP, मातृ स्वास्थ्य, NCD आदि प्रोग्राम में कोई फार्मेसिस्ट पद नहीं, urbon में दो शिफ्ट में चलने के बावजूद केवल 22 पद का विज्ञापन होना यह दर्शाता है कि पदों का निर्धारण करते समय फार्मेसी एक्ट, ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट और जनहित को ध्यान में नहीं रखा गया । किसी भी चिकित्सालय को बिना औषधि और बिना फार्मेसिस्ट संचालित नही किया जा सकता इसलिए पदों की संख्या का पुनः आकलन किया जाना आवश्यक है । साथ ही संविदा के मानदेय निर्धारण की नीति का पालन किया जाना भी आवश्यक है , मूल वेतन और वर्तमान देय महंगाई भत्ते को जोड़कर संविदा का मानदेय निर्धारित किया जाता है, जबकि एन एच एम के विज्ञापन में इसका पालन नही किया गया है । डिप्लोमा फार्मेसिस्ट का न्यूनतम मानदेय मानदेय 31828 रुपये होना चाहिए ।
वहीं बैचलर फार्मेसिस्ट को भी उनकी योग्यता के अनुसार मानदेय निर्धारित किया जाना आवश्यक है , जिससे कर्मी पूरे मनोयोग से योजनाओं का लाभ जनता को दे सकें। उपरोक्त के क्रम में आज महासंघ की बैठक सम्पन्न हुई जिसमें
महासंघ के संयोजक के के सचान, महामंत्री अशोक कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जे पी नायक, जनपद अध्यक्ष एस एन सिंह, मंत्री प्रह्लाद कन्नौजिया, प्रवक्ता अजय पांडेय, संविदा फार्मेसिस्ट संघ के अध्यक्ष प्रवीण यादव, उपेंद्र, सचिन आदि उपस्थित रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मिशन निदेशक से मिलकर अपनी मांग रखेगा ।
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