एमबीबीएस अंतिम वर्ष के मेडिकोज के लिए नेक्स्ट परीक्षा अनिवार्य, क्लीनिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी

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उच्च मेडिकल एजुकेशन के लिए भी नेक्स्ट परीक्षा पास करना होगा अनिवार्य

 

 

 

 

 

 

 

लखनऊ । राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने बहुचर्चित नेक्स्ट (नेशनल एक्जिट टेस्ट) परीक्षा से संबंधित ‘ एनएमसी, राष्ट्रीय निकास परीक्षा विनियमन, 2023 की अधिसूचना जारी कर दी है। यह परीक्षा एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए क्वालीफाइंग होगी। इसके साथ ही आगे चलकर इसी परीक्षा के स्कोर के आधार पर देश भर के मेडिकल कॉलेजों के पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश सुनिश्चित किये जायेंगे। मतलब यह कि एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा पास करने के बाद भी डॉक्टरों को यह परीक्षा देनी होगी। बिना यह परीक्षा पास किये बिना न तो उनका रजिस्ट्रेशन होगा आैर न ही वे मेडिकल प्रैक्टिस कर सकेंगे। उच्च मेडिकल शिक्षा के लिए प्रवेश हेतु भी यह परीक्षा पास करना जरूरी होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नेक्स्ट परीक्षा भविष्य में मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट पीजी परीक्षा का स्थान लेगा। यह एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए क्वालिफाइंग परीक्षा के तौर पर आयोजित किया जायेगा। इसके अलावा नेक्स्ट से ही विदेशों से मेडिकल डिग्री लिए स्नातकों को डॉक्टरी करने की अनुमति दी जायेगी। अभी इनके लिए अलग एफएमजीई परीक्षा होती है। मेडिकल प्रैक्टिस के लिए नेक्स्ट पास करना जरूरी होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

नेक्स्ट परीक्षा चरण 1 व चरण 2 दो भागों में होगी आैर दोनों चरणों की परीक्षा साल में दो बार कराई जायेगी। चरण 1 की परीक्षा कम्प्यूटर आधारित ऑनलाइन बहु विकल्पीय सवालों वाली होगी। दोनों ही चरणों की परीक्षा अभ्यर्थी मनचाही बार दे सकते हैं, बशर्ते एमबीबीएस पाठ¬क्रम में दाखिले के 10 वर्षों के भीतर चरण 1 व 2 की परीक्षा पास कर ली हो। चरण-2 की परीक्षा पास करने के बाद स्क ोर सुधार के लिए अभ्यर्थी जितनी बार चाहे चरण-1 की परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन स्कोर अंतिम परीक्षा का ही मान्य होगा।

दोनों परीक्षा पास करने पर ही मिलेगा डॉक्टरी का लाइसेंस
एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों को चरण 1 की परीक्षा पास करने के बाद आैर फिर एक साल की इंटर्नशिप करने के बाद चरण 2 की परीक्षा देनी होगी। चरन 2 की परीक्षा में वायवा, प्रैक्टिकल व क्लीनिकल सवाल पूछे जायेंगे। इन दोनों परीक्षाओं को पास करने के बाद ही डॉक्टरी का लाइसेंस दिया जायेगा,लेकिन पीजी में दाखिले के लिए नेक्स्ट चरण 1 के आधार पर रैंक तय की जायेगी। यह स्कोर पांच साल तक के लिए मान्य होगा। फाइनल एमबीबीएस परीक्षा पास करने के लिए चरण 1 की परीक्षा में सभी छह विषयों में अलग-अलग न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। एक या इससे अधिक विषय में फेल होने पर सिर्फ उन्हीं विषयों की परीक्षा अगले प्रयास में देनी होगी। इसके बाद छात्र इंटर्नशिप के पात्र होंगे।
मॉक टेस्ट की ƒ 2000 फीस का विरोध
चूंकि यह परीक्षा पहली बार आयोजित की जा रही है। इसलिए एनएमसी ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों के मार्गदर्शन के लिए 28 जुलाई को मॉक टेस्ट कराना तय किया है। लेकिन मॉक टेस्ट के लिए ƒ 2000 फीस निर्धारित किये जाने से अभ्यर्थियों में रोष है। इससे आक्रोशित एमबीबीएस छात्र मॉक टेस्ट फीस समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि यह असली परीक्षा नहीं, मॉक टेस्ट ही तो है। केवल अभ्यास परीक्षा के लिए ƒ 2000 की फीस रखना अभ्यर्थियों को आर्थिक शोषण है। एससी/एसटी व ईडब्ल्यूएसर अभ्यर्थियों के लिए ƒ 1000 फीस निर्धारित की गई है, जबकि विकलांगता (पीडब्ल्यूबीडी) वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क भुगतान से मुक्त रखा गया है। डॉक्टर्स मॉक टेस्ट परीक्षा फीस माफ करने की मांग कर रहे हैं। मॉक टेस्ट कराने का जिम्मा एम्स दिल्ली को सौंपा गया है। डॉक्टरों की मानें तो एमबीबीएस अंतिम वर्ष के करीब लगभग चार लाख अभ्यर्थी एमबीबीएस नेक्स्ट परीक्षा देंगे।

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