लखनऊ। प्रदेश में रोजगार की कमी के दृष्टिगत निजी क्षेत्रों में एएनएम पाठ¬क्रम के लिए नये नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्रों ( एएनएम पाठ्यक्रम) के खोलने पर ब्रोक लगाई जायेगी। फिलहाल नये कॉलेज व पहले से संचालित कॉलेजों में सीटों की वृद्धि के लिए 6 जुलाई से प्रस्तावित स्थलीय प्रशिक्षण को अग्रिम आदेशों तक के लिए टाल दिया गया है। बाद में यदि आवश्यकता समझी गई तो आवेदक संस्थानों को कुछ वरीयताओं के साथ प्राथमिकता दी जायेगी।
उक्त निर्णय उप्र स्टेट मेडिकल फैकल्टी की शासी समिति की बैठक में लिया गया आैर अब इस पर अमल भी आरंभ कर दिया गया है। यह निर्णय यूपीटीएसयू (उप्र टेक्निकल सपोर्ट यूनिट ) के प्रदेश में एएनएम प्रशिक्षण के आैर नये केन्द्र न खोलने हेतु दिये गये सुझावों पर लिया गया है। यूपीटीएसयू ने उक्त सुझाव एएनएम प्रशिक्षणार्थियों के लिए कम होते रोजगार के अवसर के दृष्टिगत दिया है।
वर्तमान में प्रदेश में 11 सौ से ज्यादा निजी नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेज हैं आैर एएनएम के लगभग 18000 प्रशिक्षणार्थी प्रति वर्ष उपलब्ध हो रहे हैं। यूपीटीएसयू के एक अध्ययन के अनुसार प्रशिक्षणार्थियों की इस संख्या के अनुरूप सरकारी/निजी क्षेत्र में पर्याप्त रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इससे प्रति वर्ष एएनएम बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। यूपी प्राइवेट नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज एसोसिएशन ने भी स्टेड मेडिकल फैकल्टी को अवगत कराया था कि उचित रोजगार न मिलने की स्थिति में एएनएम को निजी क्षेत्र के छोटे अस्पतालों में एएनएम से भिन्न पदों पर कार्य करना पड़ रहा है। यह भी सुझाव आया था कि द्विवर्षीय एएनएम प्रशिक्षण के नये प्रशिक्षण केन्द्र न खोले जाय व जो खुले हैं उनको धीरे-धीरे जीएनएम या बीएससी नर्सिंग में उच्चीकृत किया जाय।
बहरहाल उक्त सुझावों के दृष्टिगत यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी ने नये प्रशिक्षण केन्द्र व पूर्व से संचालित केन्द्रों में सीटों की वृद्धि के प्रस्तावों पर 6 जुलाई से प्रस्तावित स्थलीय निरीक्षण के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। यह भी कहा गया है कि आगे निरीक्षण कार्य प्रारंभ होने पर वरीयता के आधार पर निरीक्षण कराये जायेंगे। वरीयता उन संस्थानों को दी जायेगी, जिनमें दो बार निरीक्षण हो चुके है तथा वे असेवित जिलों में हैं। इसके बाद जिन संस्थानों के एक बार निरीक्षण हो चुके हैं तथा जिन संस्थानों के निरीक्षण होेने हैं। उक्त प्रत्येक वर्ग में ‘ प्रथम आगत प्रथम पावक” के आधार पर वरीयता दी जायेगी। इस व्यवस्था के अतिरिक्त उन संस्थानों से भी आवेदन मांगे गये हैं, जो स्वेच्छा से आवेदिन एएनएम पाठ¬क्रम को जीएनएम या बीएससी-नर्सिंग में उच्चीकृत करना चाहते हैं या एएनएम पाठ्यक्रम का प्रस्ताव वापस लेना चाहते हैं।
यूपी मेडिकल फैकल्टी के सचिव डॉ.आलोक कुमार ने एएनएम पाठ्यक्रम को छोड़ अन्य पाठ्यक्रमों के लिए आये आवेदनों व सीट वृद्धि प्रस्तावों पर 6 जुलाई से 5 अगस्त के बीच सत्यापन के लिए स्थलीय निरीक्षण कराना तय किया है। स्थलीय निरीक्षण केन्द्रीय टीम करेगी। इसमें कॉलेज की व्यवस्था मानक के अनुरूप न मिलने पर संंबंधित संस्थानों की मान्यता भी रद की जा सकती है व दाखिला लेने पर रोक लगाई जा सकती है।












