भारतीय चिकित्सा पद्धति में शोध व प्रचार-प्रसार की जरूरत: राज्यपाल

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लखनऊ। किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 19 वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि ऐलोपैथिक चिकित्सा शरीर के कई रहस्यों तक नहीं पहुंच सकी है। भारतीय चिकित्सा पद्धति में शोध व प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। इस काम में केजीएमयू जैसे संस्थान मदद और मार्गदर्शन करें। इसके अलावा चीन में फैली निमोनिया व सांस वाली बीमारियों से निपटने की तैयारी करे। इस पर शोध की जरूरत है।

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राज्यपाल ने कलश में जलधारा करके जल संरक्षण का संदेश के साथ दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ किया। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में 1869 मेडल्स व डिग्री प्रदान की। जिसमें 13 छात्रों आैर 26 छात्राओं को मेडल्स प्रदान किये गये।
राज्यपाल ने कहा कि सर्दी-खांसी और बुखार का वर्गीकरण जितना भारतीय चिकित्सा पद्धति में किया गया। उतना किसी दूसरी चिकित्सा पद्धति में नहीं है। चरक संहिता महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसके रचियता आचार्य चरक ने शरीर और औषधि विज्ञान की वृहद खोज की थी। डायबिटीज, दिल और टीबी की पहचान और इलाज की जानकारी वर्षों पहले दे चुके हैं। हमारा आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। राज्यपाल ने मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि अब आप स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं। आप पर समाज की बड़ी जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारें डॉक्टर, नर्स व पैरामेडिकल की कमी को पूरा करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ रही है। हर जिले में मेडिकल कॉलेज व अस्पताल खोले जा रहे हैं। मिशन निरामय: के तहत नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों की दशा सुधारी जा रही है। गुजरे आठ से नौ वर्षों में एमबीबीएस की सीटें 50 हजार से बढ़कर एक लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू में दो नए विभागों का संचालन हुआ है। इसमें थोरैसिक और वैस्कुलर सर्जरी शामिल है। इन विभागों में नस और फेफड़े से जुड़ी बीारियों का इलाज होगा। मौजूदा समय में यहां 61 विभागों का संचालन हो रहा है। शोध के लिए सात संस्थानों से करार किया है। प्लेसमेंट सेल शुरू की। यहां के 11 डॉक्टर स्टैंनफोर्ड विवि द्वारा घोषित दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में हैं।

केजीएमयू का रेडियो गूंज अवधी भाषा में लोगों तक सेहत का पैगाम पहुंच रहा है। शहर ही नहीं ग्रामीण भी सेहत को लेकर पहले से अधिक संजीदा हुए हैं।
राज्यपाल ने कहाकि केजीएमयू अब तक 20 हजार डॉक्टर तैयार कर चुका है। जो देश-दुनिया में केजीएमयू का नाम रोशन कर रहे हैं।

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डॉक्टर मेडिकल साइंस में नयी सोच के आगे बढ़े : डा. अभय

लखनऊ। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौधोगिकी विभाग के सचिव डॉ. अभय करंदीकर ने कहा कि डाक्टर नयी सोच के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्तमान परिवेश में मेडिकल व इंजीनियरिंग क्षेत्र में एमओयू करने के साथ रिसर्च भी करना होगा। डिपार्टमेंट आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इस क्षेत्र में कई बड़े कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत समेत दूसरी राष्ट्रीय योजनाओं को आगे बढ़ाने में डॉक्टर सहयोग करें। इससे मरीजों को सहयोग मिलेगा।
केजीएमयू के पूर्व कुलपति व यूरोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र भंडारी ने कहाकि नई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनसे निपटना चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों को उनके शिक्षकों को सर्वोत्तम अवसर देना चाहिए। 2003 और 2006 के बीच केजीएमयू के कुलपति रहे प्रोफेसर भंडारी ने कहा छात्रों को उन ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद करें, जो शिक्षक खुद नहीं पा सके।

डीएससी की उपाधि मिली
दीक्षांत समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौधोगिकी विभाग के सचिव डॉ. अभय करंदीकर व केजीएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. महेंद्र भंडारी को डीएससी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

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