नई तकनीक से बच सकता है कटने वाला पैर

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जब 99 प्रतिशत पैर कटवाने की नौबत आ जाती है, तो उसे नयी तकनीक से हड्डी को जोड़ कर कटने से बचाया जा सकता है। यह जानकारी जेजे हास्पिटल के डा. मंगल परिहार ने गोमती नगर स्थित निजी होटल में आयोजित एओट्रामा इंडिया इंटरनेशनल काफ्रेंस में फुट एंड ऐकंल फैक्चर की नयी तकनीक पर जानकारी देते हुए। काफ्रेंस का उद्घाटन एओकाउंसिल के डा. शरदराव, डा. मुकेश जैन व अन्य से सयुक्त रूप से दीप प्रजव्वलित करके किया। काफ्रेंस में आज लगभग एक सौ अस्सी डाक्टरों ने भाग लेकर नयी तकनीक की सर्जरी सीखते हुए मेडिकल केस पर आधारित सर्जरी से नयी तकनीक की सीखी। काफ्रेंस में आस्ट्रेलिया, चिली, अमरीका सहित अन्य देशों से आये विशेषज्ञ दो दिन शरीर की विभिन्न भागों में होने वाले आर्थो फ्रैक्चर के बारे में जाकारी दी।

डा. मंगल परिहार ने कहा कि पैर के फैक्चर में जब टिबिया का निचला हिस्सा जहां पर हड्डी टूट कर गायब हो जाता है आैर वहां पर हड्डी भी नहीं जुड़ पाती है। ज्यादातर मामलों में 99 प्रतिशत हड्ढी नहीं जुड पाने के पैर कटवाने की नौबत आ जाती है। ऐसी स्थिति में जब पैर की मेन बोन कही जाने वाली टिबिया बोन काफी गायब थी। डा. परिहार ने अपने केस टिबिया बोन के गायब होने पर फिबिया की पतली हड्डी को टेलेस पर जोड़ दिया। फिर टिबिया की बची हड्डी को फिबिया हड्डी से जोड़ दिया। अब फिबियोबोन मोटी गयी आैर मरीज अपने पैरों पर आसानी चल सकता है। पैर के घाव को प्लास्टिक सर्जरी के डाक्टरों ने फ्लैप सर्जरी से घाव को जोड़ दिया। इसके बाद मरीज आराम से चलने लगा। काफ्रेंस के आस्ट्रेलिया के लेसलुजिन ने बताया कि एंडी की आखिरी हड्डी कैलकेलियम में फैक्चर को जोड़ने की तकनीक बतायी। डा. संदीप गर्ग ने बताया कि नयी तकनीक में जोड़ को सटीक तरीके से बैठाने के साथ प्लेट डाल कर बिना प्लास्टर बांधे मरीज के फैक्चर को ठीक कर दिया।

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