लखनऊ। नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में समय से वेंटिलेटर न मिलने नजवात की मौत हो गयी। तीमारदार वेंटिलेटर पर भर्ती कराने के लिए एक से दूसरे अस्पतालों की परिक्रमा करते रहे। वेंटिलेटर न मिलने पर नवजात को निजी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गयी। राजाजीपुरम निवासी प्रतिमा को प्रसव पीड़ा होने पर रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर उसने शिशु को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार बुधवार की रात को शिशु को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। डॉक्टरों ने वहां पर ऑक्सीजन लगाकर नजवात का श्वसन तंत्र को ठीक करके की कोशिश की। इसके बावजूद सुधार न हुआ तो डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। सुबह दस बजे परिजन शिशु को लेकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के बाल रोग में परिजन शिशु लेकर पहुंचे। यह पर नियोनेटल केयर यूनिट में बिस्तर के अभाव में डॉक्टरों ने शिशु को भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिजन शिशु को लेकर बाल रोग विभाग पहुंचे। यहां पर भी डॉक्टरों ने परिजनों को आश्वासन देते हुए मोबाइल नम्बर दर्ज कर लिया आैर कहा वेंटिलेटर खाली होने पर फोन कर बुला लिया जाएगा।
परिजन करीब एक बजे तक बच्चे को लेकर ट्रॉमा सेंटर में नियोनेटल केयर यूनिट में बिस्तर खाली होने का इंतजार करते रहे। एक बजे के बाद डॉक्टरों ने शिशु को डफरिन अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन भागते हुए शिशु को लेकर डफरिन पहुंचे। यहां की इमरजेंसी में बाल रोग विशेषज्ञों ने नवजात की जांच करते हुए हालत को गंभीर बताया आैर वहां भी वेंटिलेटर की सुविधा न होना बताया। हताश होकर दुखी परिजन शिशु को लेकर प्राइवेट अस्पताल जा ही रहे थे कि रास्ते में शिशु की सांसे रूक गयी। प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने शिशु ने जांच की आैर मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि वेंटिलेटर के अभाव में शिशु की मौत हो गयी। यदि समय पर वेंटिलेटर मिल जाता तो शायद शिशु की जान बचायी जा सकती थी।
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