अरे भाई मेरा रिजल्ट आया है, मुझे लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में दाखिला मिला है, अरे भाई मेरा भी रिजल्ट आया है, मुझे भी लखनऊ के एक बड़े कालेज में इंजीनियरिंग करने का मौका मिला है। मै चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करूंगा और भाई मैं इंजीनियर बनकर बड़ी-बड़ी इमारतें बनाऊंगा और खूब पैसा कमाऊंगा। ये कहानी है दो दोस्तों की हैं जो इलाहाबाद के एक गांव में रहते हैं और मेडिकल तथा इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने राजधानी लखनऊ आते हैं। लेकिन चिकित्सा की पढ़ाई के दौरान एक छात्र को किन -किन संघर्षो से गुजरना पड़ता है। इसका नाटकिय रूपातंरण केजीएमयू के रेप्सोडी-२०१७ के दौरान मेडिकोज के छात्र-छात्राओं रोहित, अनुभव , तान्या, दिव्यांश,अमन,अभिषेक,आशीष तथा भुवनेश के अभिनय से चित्रित किया गया। रोहित जहां चिकित्सक बनकर २४ घंटे मरीजों की सेवा करके थोड़े पैसे ही कमा पाते हैं,जबकि उनका इंजीनियर दोस्त अनुभव महिने में लाखों रुपये कमा रहा होता है। इसबीच एक दिन ऐसा आता है जब चिकित्सक रोहित अनुभव की घायल पत्नी की जान बचाते हैं,तब उन्हें महसूस होता है कि जो वह कार्य कर रहे है वह सबसे बड़ी सेवा है और इसीलिए एक चिकित्सक को भगवान का दर्जा दिया जाता है। उनके मित्र अनुभव इस बात को मानते हेँ कि एक चिकित्सक का एहसान वह जीवन में नहीं भुला सकते।
किसी भी हालत में मरीज का बुरा न हो
इस अवसर पर एक नाटक मेडिकाज द्वारा और प्रदर्शति किया गया जिसमें दो चिकित्सकों की तुलना की गयी। इस नाटक में जहां एक तरफ डा.अवधेश के पास एक मरीज पेट दर्द की शिकायत के लिए आता है। जिस पर डा.अवधेश द्वारा कुद घरेलू नुस्खों की मदद से ही ठीक होने की बात कहता है। इस पर मरीज को भरोसा नहीं होता और वह दूसरे चिकित्सक डा.गुर्देश के पास जाता है और डा.गुर्देश एपेडिंक्स निकालने के बहाने मरीज की किडनी निकाल लेते हैं। इसके बाद यह मामला कोर्ट में जाता है। तब मरीज द्वारा डा.दुर्गेश की रिपोर्ट के आधार पर साबित किया जाता है कि डा.गुर्देश द्वारा उसकी किडनी निकाल ली जाती है। इस नाटक के माध्यम से चिकित्सा जगत में सिर्फ पैसे के लिए काम करने वाले लोगों पर मेडिकोज द्वारा जबरदस्त तंज किया गया है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय की कुलपति श्रुति सडोलीकर काटकर ने कहा कि जो व्यक्ति संगीत कला से दूर होता है,वह मानव न होकर पशु के समान होता है। संगीत,साहित्य व्यक्ति को जानवरों से अलग रखता है,साहित्य व संगीत एक ऐसा माध्यम है,जिससे हम अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं जिसके जीवन में संगीत व सहित्य होता है,वह कभी बूढ़ा नहीं होता। उसका शरीर बूढ़ा हो सकता है,लेकिन मन हमेशा जवान बना रहता है। इसके अलावा उन्होंने मेडिकोज छात्रों के नाटक को देखकर प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस तरह एक चिकित्सक चिकित्सा जगत में फैली बुराईयों को बेनकाब कर रहा है। वह बहुत बड़ी बात है। कार्यक्रम में केजीएमूय के कुलपति प्रो.एमएलबी.भट्ट, प्रीति कुमार, अनामिका भट्ट, डा.आर.के.दीक्षित, डा.आरएएस.कुशवाहा, डा.संदीप तिवारी, समेत मेडिकल, डेंटल तथा नर्सिंग के छात्र व छात्रायें मौजूद रहे। रेप्सोडी -२०१७ के दौरान मेडिकोज ने कव्वाली,नृत्य तथा संगीत के कर्ई कार्यक्रम प्रस्तुत किये।