लखनऊ। मौलाना आजाद डेंटल कॉलेज नई दिल्ली कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री की आचार्य और विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता तलवार ने मर्करी विषाक्तता और धातुओं से मुफ्त फीलिंग के बारे में कहा कि दांतो की फीलिंग में अमलगम का प्रयोग और लंबे समय तक इसे मुंह के अंदर रखने की वजह से इससे लगातार मर्करी निकलती है। यह मर्करी मानव शरीर में विभिन्न प्रकार के तंत्रिका तंत्र की बीमारियां पैदा करती है। मर्करी का प्रयोग की वजह से बच्चों में ऑटिज्म जैसी बीमारियां भी हो सकती है। डॉ. तलवार ने यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ ओरल मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी इंडिया चैप्टर और आईडीए लखनऊ ब्रांच की ओर से मर्करी टॉक्सिसिटी और अमलगम फ्री डेंटिस्ट्री पर आयोजित संगोष्ठी में दी।
डेंटल यूनिट के सीपी गोविला हाल में आयांेजित संगोष्ठी का उद्घाटन चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदनलाल ब्रह्म भट्ट ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता दंत संकाय प्रो. शादाब मोहम्मद ने मौजूद थे। डॉक्टर तलवार ने जन समुदाय से भी यह अपील की कि वह अमलगम मुफ्त रेस्टोरेशन को अपनाए। अमलगम रेस्टोरेशन की जगह कम्पोजिट्स और व्हाइट अमलगम का उपयोग किया जा सकता है और इसकी लागत भी उतनी ही आती है। डॉ. शादाब मोहम्मद ने बताया कि अमेरिकाए नार्वे और स्वीडन आदि देशों में दांतों में धातुओं की फिलिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन भारत में अभी भी इसका उपयोग जारी है।
कार्यक्रम में पूर्व अधिष्ठाता दंत विज्ञान संकाय केजीएमयू डॉ असीम प्रकाश टिक्कू ने कहा की अमलगम आजकल हो रहा है। भारत जैसे देश में अभी अमलगम युक्त डेंटिस्ट्री का चलन है। इसके चलन में प्रमुख कारण यह है कि यह लम्बे समय तक टिकाऊ होती है। उपरोक्त कार्यक्रम में स्वागत संबोधन आईएओएमटी इंडिया चैप्टर के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल चंद्रा ने किया। आईएओएमटी के उपाध्यक्ष डॉ. रंजीत कुमार पाटिलए डॉ. रमेश भारती उपस्थित रहे।
आइएओएमटी इंडिया चैप्टर के सचिव डॉ. अखिलानंद चौरसिया ने कहा कि मुख के अंदर अमलगम के अलावा कोई भी मिश्र धातु या मर्करी ही नहीं, बल्कि किसी भी धातु का प्रयोग किया जाता है वह नुकसान पहुंचा सकता है, उसका विषाक्तता मुख के माध्यम से अंदर कितना जाती है। इस पर अभी शोध चल रहा है। यह शोध आईआईटी कानपुर और आईएओएमटी इंडिया चैप्टर के संयुक्त तत्वाधान में चल रहा है। डा. चौरसिया ने कहा कि अभी देश में क्लीनिक वर्क में कुछ धातुओं का प्रयोग होता है, जो कि धीमे- धीमे शरीर में फैल कर दिक्कत पैदा करता है।
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