लखनऊ। शरीर में एक के बाद एक गांठ बढ़ने लगने को सावधान हो जाएगा। यह लक्षण लिम्फोमा कैंसर के हो सकते हैं। यदि इस बीमारी का शुरुआत स्टेज पर पता चल जाए तो कीमोथेरेपी के जरिए ठीक किया जा सकता है। सौ मरीजों का पहली स्टेज पर उपचार किया जाए तो 80 मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे। यह बात किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के टीमैटोलॉजी विभाग के डा. एसपी वर्मा ने मंगलवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि कैंसर लगभग 100 से भी अधिक प्रकार के होते हैं। कुछ समय पहले तक कैंसर को जानलेवा बीमारी समझा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि कैंसर को शुरुआती दौर में पकड़ लेने से काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
उन्होंने लिम्फोमा के लक्षण बतातें हुए कहा कि मरीज को गांठ के साथ लगातार बुखार आना, थकावट महसूस होना, पेट दर्द, रात को पसीना आना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, खाना निगलने में परेशानी होना, वजन घटना या खुजली होना लिम्फोमा कैंसर के लक्षण हो सकते है। बीमारी का कारण बतातें हुए डा. वर्मा ने कहा कि रक्त की वाइट बल्ड सेल्स जिन्हे लिम्फोसाइट्स कहते है। अनियंत्रित हो कर बढ़ाने लगती है और गांठ का रूप ले लेती है। लिम्फोमा कैंसर के उपचार बतातें हुए कहा कि शुरू में गांठ का इलाज करते समय डॉक्टर टीबी की दवा मरीज को दे देते थे जोकि सही नहीं है। शरीर की गांठ को नीडिल से जांचने की बजाय बॉयोप्सी या बोनमैरो की जांच करवा लेनी चाहिए जिससे कि इस कैंसर का पता चलाया जा सके।
उन्होंने बताया कि लिम्फोमा कैंसर लाइलाज बिमारी नहीं है और शुरुआत में पता चलने पर इसे दवा से ही ठीक किया जा सकता है। लिम्फोमा कैंसर की दूसरी या तीसरी स्टेज के बाद लैपरोस्कॉपी सर्जरी करके भी गांठ को शरीर से दूर किया जा सकता है। कीमोथैरेपी को सफल इलाज बतातें हुए कहा कि शरीर की किसी भी गांठ को अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बार से कैंसर बढ़ कर शरीर के दूसरे हिस्सों के साथ बोनमैरो तक भी पहुंच जाता है और वो स्थिति खतरनाक हो सकती है।












