लखनऊ। देश में तेजी से डायबिटीज महिलाओं में बढ़ने लगा है। इसका समय पर सही इलाज न होने पर गर्भवती महिलाओं को डायबटीज होने पर उसकी संतान पर भी इसका प्रभाव पड़ता है, तो यह भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए घातक हो सकता है। जागरूकता के लिए अब प्रत्येक वर्ष 10 मार्च को जस्टेशनल डायबिटीज दिवस मनाया जाएगा। यह बात शनिवार को केन्द्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कंवेशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय डायबिटीज की कार्यशाला में कही। कार्यशाला में विशेषज्ञ डाक्टरों ने भी गर्भवती महिलाओं में डायबटीज बीमारी के निजात की जानकारी दी।
पारिवारिक हिस्ट्री में डायबटीज पेशेंट हो तो सतर्कता बरतनी आवश्यक है –
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि यह बीमारी हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है बल्कि अन्य बीमारियों की होने की आशंंका हो जाती है। इसके कारण आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ता है। लोगों को जागरूक करने के लिए जस्टेशनल डायबटीज दिवस 10 मार्च को बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिनकी पारिवारिक हिस्ट्री में डायबटीज पेशेंट हो तो सतर्कता बरतनी आवश्यक है। कार्यशाला में सयुक्त सचिव डा. आनंद ने कहा कि डाक्टर डायबिटीज होने पर गोलियांे का सेवन करने का परामर्श दिया जाता है जब कि इंसुलिन को देश में वरीयता दी जाती है।
उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को गोलियों का प्रयोग करने से गर्भस्थ शिशु विकृत भी हो सकता है। कार्यशाला में केजीएमयू के वरिष्ठ डाक्टर कौसर उस्मान सहित अन्य वरिष्ठ डाक्टर मौजूद थे।