राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक की होगी स्थापना

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*-कानपुर देहात, बिजनौर, पीलीभीत, औरैया, गोण्डा, चंदौली, ललितपुर, सोनभद्र व लखीमपुर खीरी के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक की स्थापना का रास्ता साफ*

*-9 स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक बनाने के लिए 9.62 लाख प्रति महाविद्यालय के रूप में कुल 86.58 लाख रुपए की धनराशि आवंटन की स्वीकृति*

*लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लोगों को उत्तम स्वास्थ्य निदान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार ने राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर्स के सुधार और नवीनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिछले कुछ दिनों में योगी सरकार ने राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर्स के सुदृढ़ीकरण के लिए जारी कई परियोजनाओं में लंबित आर्थिक अनुदान को वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में मेडिकल फैसिलिटीज में बढ़ोत्तरी करने की विस्तृत कार्ययोजना के तहत योगी सरकार ने अब अगले चरण में प्रदेश के 9 स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

इस योजना के अंतर्गत कानपुर देहात, बिजनौर, पीलीभीत, औरैया, गोण्डा, चंदौली, ललितपुर, सोनभद्र व लखीमपुर खीरी के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक की स्थापना के लिए कुल 86.58 लाख रुपए की धनराशि जारी करने की वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह, प्रत्येक स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक स्थापना के लिए 9.62 लाख रुपए की धनराशि प्रदान किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

*नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी*
लिक्विफाइड ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए इस वर्ष 11 जुलाई को कानपुर देहात, बिजनौर, पीलीभीत, औरैया, गोण्डा, चंदौली, ललितपुर, सोनभद्र व लखीमपुर खीरी के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों ने राज्य सरकार से आग्रह किया था कि लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक यूनिट लगाने के लिए मदद की जाए। ऐसे में, योगी सरकार ने इस मांग को स्वीकृति देते हुए इस दिशा में प्रत्येक स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों को जीएसटी सहित 9.62 लाख रुपए प्रत्येक के हिसाब से कुल 86.58 लाख रुपए की धनराशि की वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इससे इन सभी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा और उन्हें उनके ही जिले में निदान आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

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