लखनऊ। प्रदेश में कोरोना संक्रमण का कहर बढ़ने से मरीजों का भर्ती होना मुश्किल होता जा रहा है। लखनऊ में पीजीआई के राजधानी कोविड-19 हॉस्पिटल, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लोहिया संस्थान सहित अन्य कोविड-19 हॉस्पिटल के फुल हो जाने से मरीजों को भर्ती होने के लिए इधर से उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मुसीबत गैर जनपदों से आए कोरोना संक्रमित मरीजों को हो रही है। पीजीआई के राजधानी कोविड-19 हॉस्पिटल में आज दोपहर के बाद से ही कोरोना संक्रमित मरीजों की भर्ती बंद कर दी गई थी। यहां आ रहे मरीजों को केजीएमयू या अन्य हॉस्पिटल जाने का परामर्श दिया जा रहा था। एंबुलेंस से आए मरीजों के साथ कर्मचारियों का कहना था, जब उन्हें पीजीआई भेजा गया है तो अन्य कोई हॉस्पिटल कैसे भर्ती कर लेगा।
इसको लेकर कई लोगों की तीखी बहस भी सुरक्षाकर्मियों से हुई। देर शाम तक पीजीआई के कोविड-19 हॉस्पिटल के बाहर भर्ती होने वाले मरीजों के एंबुलेंस काफी संख्या में एकत्र हो गई थी लेकिन बिस्तर फुल होने के कारण उनका भर्ती होना नामुमकिन हो गया था। इधर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का संक्रामक रोग विभाग भी कोरोना संक्रमित मरीजों से फुल हो गया। अभी मरीजों को वापस लौट आया जाने लगा। सुल्तानपुर ,देवरिया, हरदोई आदि जनपदों से रेफर होकर आए मरीजों के तीमारदारों ने हंगामा तक मचा दिया, लेकिन बिस्तर फुल होने के कारण नए कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करना नामुमकिन हो गया था।
यहां के नोडल अधिकारी डॉ डी हिमांशु ने बताया वार्ड में एक भी बिस्तर खाली नहीं है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक और वार्ड बनाने की तैयारी तेजी से चल रही है। कोशिश है कि कल से उस नए वार्ड में मरीजों की भर्ती शुरू कर दी जाए। हम लगातार मरीजों को बेहतर इलाज करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा राजधानी के अन्य कोविड-19 भी फुल हो जाने के कारण कोरोना संक्रमित मरीजों की भर्ती होना मुश्किल हो गया। स्वास्थ्य विभाग ने हज हाउस में मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा कई अन्य स्थानों को चिन्हित करके कोविड-19 हास्पिटल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।