लखनऊ। पुलिस बल के साये में अब जेल से कैदियों को इलाज के लिए किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में भर्ती नहीं कराना पड़ा। विशेषज्ञ डॉक्टर टेलीमेडिसिन के माध्यम से ही जेल में वहां के डाक्टरो की मदद से इलाज करेंगे। इसके अलावा आवश्यकता होने पर मरीज की जांच व इलाज का परामर्श देने के लिए डाक्टरों की एक टीम यहंा से ही चली जाएगी। इसके बृहस्पतिवार को केजीएमयू के अफसरों से जेल के अधिकारियों ने मुलाकात करके इलाज उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत बातचीत की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एस एन शंखवार बताते है कि उनकी जानकारी के अनुसार जिला जेल में लगभग 3500 से ज्यादा कैंदी हैं। यहां पर कैदियों के इलाज के लिए अलग से अस्पताल बना है आैर ओपीडी में कैदी मरीजों के इलाज के अलावा हालत बिगड़ने पर कैदियों का अलग वार्ड में भर्ती का बंदोबस्त है। इसके बाद भी पांच से 10 प्रतिशत कैदी विभिन्न प्रकार अलग- अलग की बीमारियों की चपेट में हैं। इसके कैदियों को विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज की जरूरत पड़ती है। इसके लिए उन्हें केजीएमयू में विशेषज्ञ डाक्टरों से इलाज व जांच कराने के लिए लाना पड़ता है, जिसको लाने के लिए पुलिस बल को तैनात करना पड़ता है।
डा.शंखवार का कहना है कि जेल प्रशासन के पास संसाधनों का संकट है। लगातार कैदियों को लाने-ले-जाने के लिए वाहनों की सही व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कैदियों को समय पर इलाज कराने के लिए पुलिस बल व संसाधनों की कमी आ रही है। कैदी मरीजों को लाने में वेंटिग बढ़ती जा रही है।
डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि जेल अस्पताल में सरकारी डॉक्टर होते हैं। वहां टेलीमेडिसिन सेंटर बनाने की सहमति भी हो गयी हैं। यहां पर पहले से टेलीमेडिसिन सेंटर है। जेल अस्पताल के डॉक्टर केजीएमयू के विशेषज्ञ टेलीमेडिसिन के जरिए मरीज को दिखाते हुए बात चीत करेगे। स्क्रीन पर जेल के डाक्टर ब्लड प्रेशर नापना व अन्य प्राथमिक उनके सामने ही करेंगे। इसके बाद उसकी रिपोर्ट देखकर डॉक्टर परामर्श देंगे। उन्होंने बताया कि इससे कैदियों को तत्काल इलाज मिल जाएगा आैर सुरक्षा भी चाक चौंबद रहेगी।
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