लखनऊ- खराब आहार और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण तेजी से बढ़ती जीवन शैली की बीमारियों के मद्देनजर, समाज के सभी वर्गों में बढ़ती जा रही है। इसके लिए लाइफटाइम जेनेटिक्स प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। यह बात किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के सेल्बी हॉल में आयोजित ‘जेनेटिक रेवोल्यूशन’ पर सेमिनार में बोलते हुए जेनेटिक्स विशेषज्ञअवधेश सिंह ने कहा कि लोगों को बीमारियों का इंतज़ार करने की जगह उनसे बचाव का प्रयास करना चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो फिर इलाज के लिए जाना चाहिए, बल्कि भविष्य में होने वाली बीमारियों के लिए अनुवांशिक संवेदनशीलता की जानकारी भी पता कर सकता है, जब कोई व्यक्ति पहले से ही विभिन्न बीमारियों के लिए आनुवंशिक जोखिम कारकों को अच्छी तरह से जानता है, तो न्यूट्रीजनोमीक्स का उपयोग करके निवारक उपाय करना संभव है।
जो सही भोजन की आदतों के साथ जीन-आधारित आहार योजना और सटीक शारीरिक गतिविधियों सहित जीन-आधारित जीवन शैली संशोधनों का समायोजन है। मिलिंद दोशी ने कहा कि डाक्टरों के पास अपने क्षेत्र में उपचार की लाइन का चयन करते समय अपने रोगियों की आनुवंशिक जानकारी कर सकते है। वेलोसिटी जेनेटिक्स के सीएमडी स्टैन सेराओ ने बताया इस जेनेटिक्स प्रोग्राम में केवल लार आधारित डीएनए परीक्षण नहीं है, बल्कि एक व्यापक 12 महीने का वेलनेस प्रोग्राम है, जिसमें डीएनए रिपोर्ट, न्यूट्रिग्नोमिक्स काउंसलर द्वारा आनुवंशिक परामर्श, जीन-आधारित व्यक्तिगत परामर्श और 6 साल की जीन-बैंकिंग सुविधा है। सेमिनार में केजीएमयू के आर्थोपैडिक विभाग के डा. संतोष, डा. अमिता पांडे सहित अन्य वरिष्ठ डाक्टर मौजूद थे।
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