देश में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के टाप 5 में kgmu का रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग

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लखनऊ। देश के टॉप फाइव रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित कर दिये गये है। इसमें किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू ) भी शामिल है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इसके अलावा केजीएमयू ने गंभीर टीबी संक्रमण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) गंभीर टीबी के मरीजों का भर्ती वार्ड पहले से अलग था, लेकिन अब आवागमन भी अलग करा जा रहा है। इसके लिए निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। अभी एमडीआर टीबी पीड़ित, श्वसनतंत्र के मरीज, डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ एक ही गेट से विभाग में आवागमन हैं। इससे संक्रमण फैलने की संभावन बहुत ज्यादा हो जाती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डा. सूर्यकांत ने बताया कि बीते दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स टीबी एंड लंग्स डीसीज की टीम ने विभाग का निरीक्षण कि या था। निरीक्षण के दौरान एमडीआर टीबी मरीजों के आवागमन का रास्ता अलग करने परामर्श दिया था। इसके अलावा साथ ही टीबी व सांस के मरीजों की ओपीडी अलग चलाने के लिए कहा था।
डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि विभाग में 163 बिस्तर हैं। इसमें 20 बिस्तरों पर एमडीआर टीबी के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। अभी विभाग में प्रवेश व निकलने का रास्ता एक ही है। इसी रास्ते से एमडीआर टीबी के मरीज भी वार्ड में जा रहे हैं। टीम के परामर्श पर ही एमडीआर टीबी मरीजों के लिए अलग रास्ता बनाया जा रहा है। लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट के निकट से रास्ता बनाए जाने के लिए कार्य शुरू करा दिया गया है। यहां डॉट्स सेंटर से मरीज की भर्ती होगी। सीधे गंभीर मरीज पीछे के रास्ते से अपने वार्ड में शिफ्ट किए जा सकेंगे। इसके अलावा ओपीडी में टीबी के मरीज एक तरफ देखे जाएंगे, तो दूसरी तरफ रेस्पेटरी बीमारी से पीड़ित मरीज व दूसरी बीमारी से पीड़ितों के लिए ओपीडी संचालित होगी। इससे किसी हद तक एमडीआर टीबी के संक्रमण को रोकने में सहायता मिलेगी।

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