लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों का भोजन अद्योमानक है। आरोप है कि यहां पर बेसन के नाम पर आटे में हल्दी मिलाकर मरीजों को हाई प्रोटीन डाइट के नाम पर रोटी परोस दी जाती है। शताब्दी अस्पताल में चल रही निजी संस्था से संचालित किचन में मिलावटी खाना बनाकर मरीजों को दिया जा रहा है। बताया जाता है कि इसकी शिकायत कुछ डाइटीशियनों ने जिम्मेदार अफसरों से लिखित की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी मौखिक रूप से शिकायत को किया जाना मान रहे है।
केजीएमयू प्रशासन ने अपना किचन बंद करके मरीजों के लिए निजी संस्था को खाना बनाने की जिम्मेदारी दे रखी है। यह जिम्मेदारी करीब दो साल पहले सौंपी गयी थी। यहां करीब तीन हजार मरीजों के लिए खाना बनता है। यहां किचन में तीन डाइटीशियन को मरीजों की डाइट का निर्धारण करती है। आरोप है कि निजी संस्था मिलावटी खाना में प्रमुख रूप से बेसन के स्थान पर आटे में हल्दी मिलाकर रोटी बना देती है। बताते है कि एक दो बार तो डाइटीशियनों ने टिप्पणी करने पर मामलों को कैंटीन संचालक ने टाल दिया। इसके बाद कई बार अन्य खाने में मिलावट होता देख डाइटीशियन ने जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। इसके बाद विभाग में हड़कम्प मच गया। मामले को पटाक्षेप करने की कोशिश की गयी आैर मामले को दबा दिया गया। निजी संचालक द्वारा चलायी जा रही किचन पर लगातार आरोप लग रहे है।
अारोप है कि शताब्दी में चल रही किचन पहले सरकारी कर्मचारियों के द्वारा संचालित होती थी। तब खर्च करीब 35 लाख रुपए आता था। अब किचन को निजी संस्था को सौंप दिया गया। इसमें अब खर्च लगभग 80 लाख रुपए आ रहा है।
इस व्यवस्था में प्रमुख रूप से जुड़ी अधिकारी डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव का कहना है कि रोटी में बेसन की जगह हल्दी मिलाने की लिखित शिकायत नहीं, बल्कि मौखिक मामला उठा था, शिकायत पर उन रोटियांे को मरीजों को भेजने से रोक दिया गया। उनका कहना है खाने की गुणवत्ता परखने बाद ही विभागों में भेजा जाता है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। मुूख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एस एन शंखवार का कहना है कि किचन इंचार्ज डा. कीर्ति श्रीवास्तव है। शिकायत उनके पास आयी होगी। अभी उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आयी है।
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