Kgmu:अभी नहीं शासन देगा संस्तुति,तब बढ़ेगा शुल्क

0
708

 

 

 

लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में ओपीडी से लेकर पैथालॉजी तक शुल्क अभी नहीं बढ़ेगा। शुक्रवार को कार्यपरिषद की बैठक में चर्चा के बाद इलाज के लिए शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव को शासन को भेजने का निर्णय लिया गया। जहां से संस्तुति मिलने के बाद शुल्क को बढ़ाया जाएगा। हंगामेदार रही बैठक में डेंटल लीक प्रकरण में चिकित्सक शिक्षक ों को चेतावनी देकर आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही रेजीडेंट डाक्टरों की भर्ती उम्र 45 वर्ष कर दी गयी है। इस अलावा महत्वपूर्ण निर्णय में विदेशों से मेडिकल डिग्री धारी छात्र केजीएमयू में बिना शुल्क इंटर्नशिप कर सकेंगे। इसमें नेशनल मेडिकल कमीशन ने इंटर्नशिप के लिए शुल्क लेने के लिए मनाही की है।

 

 

 

 

 

 

केजीएमयू कु लपति प्रो. विपिन पुरी की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में केजीएमयू में ओपीडी से लेकर पैथालॉजी शुल्क तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। काफी देर तक चली चर्चा के बाद प्रस्ताव को शासन भेजने का निर्णय लिया गया। वहां से संस्तुति के बाद बढ़े हुए शुल्क को लागू किया जाएगा। बताते चले कि केजीएमयू की चिकित्सा व्यवस्था आैर अन्य मदों में प्रदेश सरकार करीब 950 करोड़ रुपये का बजट देती है। केजीएमयू इलाज के लिए मरीज की जांच से लेकर भर्ती तक का शुल्क मरीजों से लिया जाता है।

 

 

 

 

इससे प्रत्येक महीने करोड़ों रुपये की आय केजीएमयू को होती है। अलग- अलग विषयों पर प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। अब यहां इलाज को उच्चस्तरीय करने का दावा करते हुए महंगा करने का प्रस्ताव बनाया गया। इसको हॉस्पिटल बोर्ड की बैठक में अधिकारियों ने ओपीडी शुल्क दोगुना करने का प्रस्ताव रखा था। वर्तमान में ओपीडी पंजीकरण शुल्क 50 रुपये चल रहा है, जो छह महीने के लिए मान्य होता है। छह महीने बाद इसे दोबारा शुल्क चुका कर नवीनीकरण कराना पड़ता है। अब पंजीकरण शुल्क 100 रुपये किये जाने का प्रस्ताव है। पैथालॉजी की जांचों में भी शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दिया था। इसके अलावा प्राइवेट रूम का किराया बढ़ा दिया जाएगा।

 

 

 

 

इसके अलावा कार्यपरिषद की बैठक में कुलपति से अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित नेत्र रोग विभाग के डा. गौरव को चार्जशीट देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा बैठक में वर्ष 2019 में केजीएमयू के डेंटल यूनिट में सीनियर रेजीडेंट की भर्ती का पेपर लीक हो गया था। मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में तीन डाक्टरों को इसके लिए जिम्मेदार माना गया था। कार्यपरिषद में दो शिक्षकों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। तत्कालीन परीक्षा निंयत्रक को कार्यपरिषद ने पहले ही दोषमुक्त करार दे दिया था। वही केजीएमयू के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग में प्रत्येक बृहस्पतिवार को चलने वाली लंग कैंसर कलीनिक के संचालन पर रोक लगा दी गयी है।

 

 

 

 

इस प्रकरण में शिकायत की गयी थी कि पल्मोनरी क्रिटकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से संचालित क्लीनिक का नाम मिलता जुलता नाम था। बैठक में बाल रोग विभाग में पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग में विलय की मंजूरी मिल गयी है। इसी प्रकार इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी पालिसी में सुधार कि या जाएगा। कार्डियोलॉजी विभाग के डा. ऋषि सेठी की ओर से तैयार की इस पालिसी में कार्यपरिषद ने कई बिंदुओं पर संसोधन करने के लिए कहा है।

Previous articleप्रदेश में राज्यकर्मियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढोत्तरी
Next articleउखाड़ने के बाद तुरंत लग सकेंगे नकली दांत

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here