लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। केजीएमयू में पर्यावरण विभाग और डब्ल्यूएचओं के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने किया।
कार्यशाला में प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि हेल्थ केयर सेंटर में बायो मेडिकल वेस्ट के नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए। इसमें तकनीक का इस्तेमाल भी जरूरी है। जिससे बायो मेडिकल वेस्ट कलेक्शन और डिस्पोजल की प्रक्रिया बेहतर हो सके।
बताते चले कि राजधानी के इटौंजा, रायबरेली के समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बहराइच मेडिकल कालेज में बायो मेडिकल वेस्ट के कलेक्शन और निस्तारण की स्थित बहुत अच्छी नहीं थी। करीब छह महीने पहले इन अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट कलेक्शन और निस्तारण की स्थित को सुधारने की जिम्मेदारी केजीएमयू के पर्यावरण विभाग को दी गई। केजीएमयू ने महज छह महीनों में न सिर्फ इन अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट कलेक्शन और निस्तारण की व्यवस्था सुधार गयी। बल्कि निगरानी के लिए एक कमेटी बना कर व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलायी जा रही। केजीएमयू के इस प्रयास की भारत में डब्ल्यूएचओ की उप प्रतिनिधि पेडेन ने सराहना भी की है।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने विश्वविद्यालय पर्यावरण विभाग (यूईडी) को एक नोडल केंद्र घोषित करने का अनुरोध किया। केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.डी.हिमांशु ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट कलेक्शन और डिस्पोजल की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए एक तंत्र विकसित है, लेकिन छोटे निजी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट कलेक्शन और डिस्पोजल की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।