केजीएमयू ने शुरु किया जागरूता अभियान

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभागा द्वारा टी.बी. जागरूकता सप्ताह जन हस्ताक्षर अभियान का आयोजन चिकित्सा विश्वविद्यालय के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग द्वारा किया गया। इस अभियान को चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमएल बी भट्ट जी द्वारा झण्डा दिखाकर रवाना किया गया।

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कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो. अमिता जैन ने बताया कि 19 से 24 मार्च के मध्य विश्व टीबी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया जायेगा। सोमवार को रैली प्रशासनिक भवन से प्रारम्भ होकर ट्रॉमा सेण्टर तक गई, जिसमें चिकित्सा विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों , विभिन्न स्वयं सेवी संगठनो के साथ-साथ ऑम लोगो द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम में सैक ड़ों लोगों ने भाग लिया और टीबी के प्रति समाज में जागरूकता लाने के लिए शपथ ली। कार्यक्रम की सचिव डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि के.जी.एम.यू. द्वारा टी.बी. जागरूकता सप्ताह 19 से 24 मार्च के मध्य टी.बी. जागरूकता सप्ताह जन हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है, जो 24 मार्च को विश्व तपेदीक दिवस के अवसर पर जन समुदाय में इसके प्रति जागरूकता लाने एवं इसके सामाजिक एवं आर्थिक परिणमों के प्रति जागरूकता और विश्व स्तर पर टीबी के महामारी को खत्म करने के प्रयासों को बढ़ाना है।

प्रो. अमिता जैन ने बताया कि टीबी विश्व भर में मृत्यु के 10 शीर्ष कारणो में से एक है, जिससे बचा जा सकता है। फुस्फुसीय एवं अतिरिक्त फुस्फुस्ीय टीबी की जल्द पहचान एवं उसका उपचार बच्चों एवं बड़ो दोनों में महत्वपूर्ण है। केजीएमयू भारत को 2025 तक टीबी मुक्त करने के मिशन को आगे बढ़ाने मे महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए कटिबद्ध है।

कार्यक्रम का आयोजन विश्व स्तर पर टीबी उन्मूलन के निर्धारित समय सीमा 2025 से पांच वर्ष पहले खत्म करने का है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानको के अनुसार टी.बी. उन्मूलन से तात्पर्य 10 लाख लोगो की आबादी में एक से कम टी.बी. का केस होना चाहिए। प्रति वर्ष 28 लाख टी.बी. के नये केस एवं इससे 5 लाख लोगो की मृत्यु प्रत्येक वर्ष होती है । माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. अमिता जैन ने बताया कि प्रत्येक वर्ष लैबोरेटरी में 5000 मरीजो की जांच की जाती है, जो कि केजीएमयू एवं प्रदेश के विभिन्न जिलों से आरएनटीसीपी कार्यक्रम के तहत रेफर किये जाते है। लैबोरेटरी द्वारा निःशुल्क सेवा प्रदान की जाती है जोकि आरएनटीसीपी कार्यक्रम के तहत भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार एवं विभिन्न एनजीओ द्वारा समर्थित है।

कार्यक्रम में राजेश कुमार राय, कुलसचिव, प्रो. जी.के सिंह, विभागाध्यक्ष, अर्थोपेडिक सर्जरी विभाग, प्रो. एस.एन. शंखवार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू, प्रो. विजय कुमार, चिकत्सा अधीक्षक, प्रो. विमला वेंकटेश, प्रो. गोपा बनर्जी, प्रो. उर्मिला सिंह, डॉ. नवनीत कुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ. अविनाश अग्रवाल, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. पवन सिंह, सहित चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागो के संकाय सदस्य, विद्यार्थि एवं अन्य लोग उपस्थित रहें।

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