लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग है, जिसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय ने मांगी तो उसे तलाशना पड़ गया । हालांकि बुजुर्गो के बेहतर इलाज के लिए बनने वाले जिरियाट्रिक विभाग के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ढाई करोड़ रुपये बजट दे चुका है,लेकिन यह अभी तक केजीएमयू के खाते में न आने से विभाग नहीं बन सका है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जब केजीएमयू से जीरियाट्रिक मेडिसिन विभाग का अपडेट मांगा, तो केजीएमयू प्रशासन में हड़कम्प मचा गया आैर शासन को पत्र लिख कर बजट दिये जाने की मांग की गयी हंै।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुजुर्गो की विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए प्रदेश के केजीएमयू में जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग की स्थापना का निर्णय लिया। इस विभाग में बुजुर्गो को होने वाली बीमारियों का इलाज एक छत के नीचे ही किया जाना है। इसके लिए दवा, वैक्सीन व अन्य सुविधाओं के लिए मई 2016 में पहले बजट की किश्त एक करोड़ रुपये दिये गये। इसके बाद जून महीने में फिर डेढ करोड़ रुपये बजट दिया गया, लेकिन यह बजट सीधे केजीएमयू के खाते में आकर राजस्व विभाग में गया। बताया जाता है कि अभी तक यहंा से यह बजट अभी तक केजीएमयू के खाते में नहीं भेजा गया। यहीं नहीं विभाग के लिए केजीएमयू के नियमानुसार मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डाक्टर कौसर उस्मान को जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग को प्रमुख भी बना दिया।
इसके बाद डा. कौसर उस्मान से बुजुर्गो के लिए आैपचारिक रुप से ओपीडी तो शुरू कर दी, लेकिन कागजों पर अभी यह ओपीडी भी नजर नही आती है। विभाग कहां बना है आैर कौन कहां बैठता है। इसकी जानकारी भी क ही दर्ज नहीं है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो महीने केजीएमयू प्रशासन से जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग का अपडेट मांगा तो सभी सन्नाटे में आ गये। केजीएमयू प्रशासन ने पहले तो विभाग के बारे में खुद जानकारी एकत्र की तो पता चला कि बजट न आने के कारण अभी कागजों पर ही यह विभाग चल रहा है। आनन-फानन में शासन को बजट रिलीज करने की मांग की गयी है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय बुजुर्गो के इलाज के प्रति गंभीर है आैर इसकी जानकारी एकत्र कर आकड़े भी एकत्र कर रहा है।












