लखनऊ। केजीएमयू के बुध पार्क की तरफ खुलने वाले गेट पर शनिवार दोपहर गेट बंद होने के चलते हंगामे की स्थिति पैदा हो गयी। लोग गेट खोलने के लिए गार्ड से कहते रहे। लेकिन गार्ड ने किसी की एक न सुनी। इस पर लोगों की गार्ड से कहासुनी भी हुयी। इस दौरान वहां दो रेजीडेंट चिकित्सक भी पहुंचे,उन्हें भी बाहर जाना था। लेकिन गार्ड ने उन चिकित्सकों को यह कहकर रुकने को कहा कि आप के लिए गेट खोलते ही पब्लिक भी इधर से निकलने लगेगी। इस दौरान वहां पर कुछ गम्भीर मरीज भी खड़े हुये थे। काफी कहने सुनने के बाद भी जब गार्ड ने गेट नहीं खोला और चिकित्सक ों को देखते हुए पब्लिक ने खुद गार्ड से कह दिया कि आप गेट खोल दीजिए हम लोग इधर से नहीं जायेंगे। जिसके बाद गार्ड ने गेट खोला और रेजीडेंट चिकित्सक जा सके। हालाकि दिन भर बंद रहने के बाद शाम को गेट खोल दिया गया।
केजीएमयू में गार्डों की हठधर्मिता कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालात यह है कि लोगों के साथ आये दिन ये बद्तमीजी करते हुये आसानी से देखे जा सकते हैं। गार्डो का रवैया मरीजों के प्रति गुंडई वाला रहना अब आम बात हो गयी है। जानकारों की माने तो इसका मुख्य कारण केजीएमयू प्रशासन का गार्र्डो के प्रति नरम रवैया है। किसी मरीज से पैसे की वसूली से लेकर गाली गलौज तक प्रसिद्व केजीएमयू के गार्ड यहां के चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के प्रति तो अपनी भक्ति दिखाते हैं,लेकिन मरीजों की बात आते ही उन्हें नोचने दौड़ते हैं।
गेट पर हंगामे की बात तो बानगी मात्र है। बीते शुक्रवार को शाताब्दी फेज-? की पार्किंग पर तैनात गार्ड वृजभान सिंह ने मरीज द्वारा स्टैंड पर गाड़ी न खड़ी करने पर उससे गाली गलौज तक की। इसकी शिकायत जब केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डा.विजय कुमार से की गयी। तो उन्होंने वह इलाका डा.ओझा का होने की बात कह अपना पल्ला झाड़ लिया। जानकार बताते हैं कि मरीजों की गाड़ी स्टैंड पर खड़ी कराने के एवज में गार्डो को ठेकेदार द्वारा कमीशन दिया जाता है। जिससे आये दिन यहां पर झगड़ा होता है।












