लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में किडनी प्रत्यारोपण पर अभी संकट के बाद छटे नही है। खुद किडनी प्रत्यारोपण करने का सपना एक वर्ष आैर लेट हो गया है। निर्माण विभाग द्वारा इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) न शुरु होने से अब किडनी प्रत्यारोपण मार्च वर्ष 2018 के बाद ही होने की संभावना है।
शताब्दी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण के लिए आपरेशन थियेटर बनने के बाद आईसीयू के बनाने के कार्य निर्माण विभाग को दिया गया था। दावा किया गया था कि आईसीयू का निर्माण वर्ष 2016 में पूरा हो जाएगा आैर केजीएमयू खुद किडनी प्रत्यारोपण करने लगेगा, पर आईसीयू बनाने वाली कार्यदायी विभाग ने बजट न होने के कारण तीन से चार महीने का काम ठप कर दिया। उसका दावा था कि सामान के दाम बढ़ने के बाद बजट मिलना मुश्किल हो गया। हालांकि केजीएमयू प्रशासन ने तीन से चार किडनी प्रत्यारोपण करने में सफलता भी प्राप्त की थी, जिसमें एक दो किडनी प्रत्यारोपण सफल भी हो गये थे।
इसके बाद पूरा सेट होने के बाद ही किडनी प्रत्यारोपण करने का निर्णय लिया गया। कई ब्रोन डेड मरीजों की किडनी निकाली भी गयी, लेकिन पीजीआई या अन्य चिकित्सा संस्थान को किडनी दे दी गयी, पर केजीएमयू अब खुद किडनी प्रत्यारोपण करना चाहता है। फिलहाल मार्च के बाद ही किडनी प्रत्यारोपण करके लिए केजीएमयू के पास अपना आईसीयू हो सकेगा।