लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक कॉर्नियों से दो नेत्रहीनों को प्रत्यारोपित कर आंखों की रोशनी ठीक कर दी है। इस तरह दो कॉर्निया चार नेत्रहीनों में प्रत्यारोपित करने में सफलता मिली है। डॉक्टरों का कहना है कि कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद मरीज ठीक हैं। चारों मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है।
केजीएमयू नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरुण शर्मा ने कॉर्निया प्रत्यारोपण किया है। डॉ. अरूण ने बताया कि अगर देखा जाए तो केजीएमयू में आमतौर पर एक कॉर्निया को एक मरीज में ही प्रत्यारोपित की जा रही है। उन्होंने बताया कि नयी तकनीक से एक कॉर्निया दो मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया है। नेत्रदान के तहत दो कॉर्निया आयी थीं। इस लिए नेत्रहीन मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए तुरंत तैयार किया गया। सर्जरी कर दो कॉर्निया चार मरीजों में प्रत्यारोपित कर दी गईं।
डॉ. अरुण ने बताया कि कॉर्निया के ऊपरी भाग को डीप इंटीरियर लेमलर केराटोप्लास्टी (डाल्क) कहते हैं। इसके अलावा नीचे के भाग को डेसिमेट स्ट्रिपिंग एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी (डीसेक) कहते हैं। इस तरह कॉर्निया को बीच से दो भाग में बटवांरा कर दिया गया। जिन मरीज में कॉर्निया की ऊपरी लेयर किन्ही कारणों से खराब हो गयी थी। उनकी आंखों में डाल्क हिस्सा प्रत्यारोपित किया गया। डा. अरूण ने बताया कि जिन मरीजों की कॉर्निया के निचला भाग में गड़बड़ी थी। उनकी आंखों में डीसेक प्रत्यारोपित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि एक मरीज में कॉर्निया प्रत्यारोपण करने में सिर्फ 30 मिनट का समय लग गया। प्रत्यारोपण के बाद मरीजों को आवश्यक सावधानी बरतने की निर्देश दिया गया है। समय-समय पर फालोअप के लिए बुलाया गया है, ताकि मरीजों को संक्रमण से बचाया जा सके।