लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कार्यपरिषद सदस्यों की टीम में गठिया रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. एसके दास को शामिल कि या गया है। इसके लेकर बवाल मच गया है। यहां के संकाय सदस्यों ने राजभवन, स्वास्थ्य मंत्री सहित अन्य को शिकायती पत्र भेज कर आरोप लगाया है कि केजीएमयू एक्ट का उलंघन किया जा रहा है।
राजभवन भेजे गये शिकायती पत्र में कहा गया है कि केजीएमयू एक्ट में प्रावधान है कि कार्यपरिषद का सदस्य वही हो सकता है, जिसके परिवार का कोई भी सदस्य केजीएमयू में कार्यरत न हो। जब कि डा. सिद्धार्थ दास तो रिटार्यड हो गये है, लेकिन उनकी पत्नी डा. विनीता दास स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष रहने के साथ ही मेडिकल संकाय डीन के तौर पर कार्यपरिषद में हैं। इतना ही नहीं सूचना केअधिकार के तहत डीन ने यह जानकारी दी है कि डा. सिद्धार्थ की नियुक्ति संबंधी दस्तावेज कार्यालय में ही नहीं है।
इस कारण अभी तक केजीएमयू प्रशासन उनकी पेंशन संबंधी काम भी नहीं हो पा रहा है। इसके बाद भी उन्हें कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने नियमों को ताक पर रखकर कार्यपरिषद में सदस्य के रूप में शामिल कर लिया गया है। यहीं नहीं दीक्षांत समारोह में दिया जाने वाला मेडल भी अचानक डा. दास को नहीं दिया गया था। केजीएमयू प्रवक्ता डा. सुधीर का कहना है कि कुलाधिपति कार्यालय के दिशा निर्देश पर डा. सिद्धार्थ दास को कार्यपरिषद में शामिल किया गया है। आगे भी जैसा निर्देश होता उसका पालन किया जाएगा।
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