लखनऊ । किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डा. सूर्यकांत पर पीआईएल की सुनवाई में केजीएमयू प्रशासन को दो महीने के अंदर कानून के अनुरुप कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डाक्टर पर शोध कार्य में बजट का दुरुपयोग, प्राइवेट प्रैक्टिस करने तथा अन्य आरोप लगे है। इन आरोपों की जांच कमेटी करके रिपोर्ट पूर्व कुलपति को सौपी जा चुकी है। फिर भी कोई सुनवाई नही हुई है।
डा. सूर्यकांत पर आरोप है कि उन्होंने दमा पर शोध के लिए आईसीएमआर भारत सरकार सन 2009 -12 के बीच साढ़े ग्यारह लाख रुपये आवंटित किये गये। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि प्रो. बी के खन्ना की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग एक लाख रुपये की कूटरचित , फर्जी रसीदों का समायोजन किया गया। डाक्टर एक निजी अस्पताल में मरीजों पर नयी दवाओं का ट्रायल भी लेते है। इसमें नियमो का पालन नही किया आैर लार्खो रूपये कमाये गये। इसके अलावा प्रो. बीके खन्ना की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने भी पाया की डा. सूर्यकांत सरकारी आवास में अवैध रूप से प्राइवेट प्रैक्टिस करते है। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्यपरिषद ने डा. सूर्यकांत के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश तत्कालीन कुलपति प्रो. रविकांत से आईसीएमआर ने शिकायत पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये। इसमें खास तौर पर कहा गया था कि अनइथेक्सि शोध पर एमसीआई द्वारा अपील पर केजीएमयू के कु लसचिव को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिये। एमसीआई में अपील निस्तारण के निर्देश पर कुलसचिव केजीएमयू ने कोईवाई नहीं। इस आधार पर उच्च न्यायालय में पीआई एल वादी ने डाल दी। पीआईएल की सुनवाई पर माननीय उच्चन्यायालय ने लखनऊ ने केजीएमयू को निर्देश दिया कि एमसीआई के पत्र दिनांक 23 मई 20017 के क्रम में वादी को समुचित अवसर देते हुए डा. सूर्यकांत के विरुद्ध दो महीने के अंदर कानून के अनुरुप कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए क हा है।












