Kgmu: पोस्ट टीबी मरीजों के लिए विश्व टीबी दिवस पर स्थापित होगी एक नयी क्लीनिक

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा सूर्यकांत ने विश्व टीबी दिवस की पूर्व संध्या पर बताया कि एक अध्ययन के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत टीबी के रोगियों के उपचार के बाद भी फेफड़े में धब्बें/घाव/फाइब्रोसिस/कैल्सीफिकेशन/कोलैप्स तथा सांस की नलियों में रूकावट जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जिससे रोगी को टीबी के इलाज के बन्द होने के बाद भी खांसी/सांस व अन्य तकलीफों का सामना करना पड़ता है। उनको पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र में अब पूरी तरह से निःशुल्क उपचार प्रदान किया जायेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

यह घोषणा पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र के संस्थापक प्रभारी व रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. सूर्यकान्त ने की।  डा. सूर्यकान्त ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत ऐसे पोस्ट टीबी डिसीज के रोगियों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। विश्व टीबी दिवस पर 24 मार्च 2026 से एक नई पोस्ट टीबी डिसीज क्लीनिक का शुभारम्भ किया जायेगा। देश में केजीएमयू पहली संस्था होगी जो कि इस तरह की सुविधा शुरू करेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डा. सोनिया नित्यानन्द, कुलपति, केजीएमयू ने कहा कि टीबी से उबर चुके रोगियों को नई जिंदगी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में “पोस्ट टीबी डिज़ीज़ क्लीनिक” एक वरदान के रूप में साबित होगी।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम नार्थ जोन टास्ट फोर्स के चेयरमैन डा. सूर्यकान्त ने कहा कि पोस्ट टीबी डिसीज के रोगियों के लिए शोध के द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि पोस्ट टीबी डिसीज के रोगियों की पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता पड़ती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के सह प्रभारी डा. अंकित कुमार ने बताया कि पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केन्द्र में सांस के रोगों के विशेषज्ञ, फिजियोथैरेपिस्ट, डाइटिशियन, काउंसलर, सोशल वर्कर आदि की एक पूरी टीम की आवश्यकता होती है जो कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में मौजूद है। अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय शोधों के आधार पर यह देखा गया है कि तीन महीने के पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के प्रयोग से रोगियों को काफी आराम मिल जाता है, साथ ही साथ उनके जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है।

 

 

 

 

 

 

 

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