लखनऊ । किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में दलाल किसी न किसी प्रकार अंदर घुस कर मरीजों को बरगलाने की कोशिश कर रहे है। अब ट्रामा सेंटर के अंदर फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया है। गले में स्टेथोस्कोप लटकाए एप्रेन पहने बेखौफ मरीजों का क्लीनिक पड़ताल कर रहा था। अपने बीच नये डॉक्टर को देख पैरामेडिकल स्टाफ, कर्मचारियों को शक होने लगा तो पूछताछ शुरू की। पूछताछ में वह अकड़ कर डपटने लगा आैर बाहर की ओर जाने की कोशिश की। कर्मचारी व सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया आैर वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के बाद पुलिस को सौंप दिया।
केजीएमयू प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस में तहरीर दे दी है।
इमरजेंसी के कैजुअल्टी वार्ड में गले में स्टेथोस्कोप लटकाए दोपहर में एक युवक मरीजों के बिस्तर पर जाकर परिजनों से इलाज के कागजात लेकर जानकारी ले रहा था। कर रहा था। इस बीच वहां पर तैनात पैरामेडिकल व कर्मचारियों को उसके बात चीत करने के तरीके पर शक हुआ। उन्होंने युवक से उसका परिचय पूछा। आईकार्ड देखा तो उसमें उसका नाम सत्यम लिखा था। उसने खुद को न्यूरो सर्जन बताते हुए केजीएयमू के न्यूरो सर्जरी विभाग का रेजिडेंट होना बताया। कर्मचारियों ने भी युवक की पहचान के लिए न्यूरो सर्जरी विभाग के रेजिडेंट को बुला लिया। विभाग के रेजिडेंट ने युवक को पहचानने से मना कर दिया। इस पर कर्मचारियों को पकड़ कर बैठा लिया। उन्होंने ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप तिवारी को जानकारी दी। मौके पर डॉ. संदीप तिवारी ने पहुंच कर सख्ती से पूछताछ शुरू की। इस बीच उसने भागने की कोशिश की, तो कर्मचारी और सुरक्षा गार्डों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया।
डॉ. संदीप तिवारी ने युवक की जांच करते हुए आईकार्ड देखा, तो उसमें संजय गांधी इंस्टीटयूट मेडिकल साइंसेस लिखा था। पीजीआई का नाम भी गलत दर्ज था, यही नहीं डिग्री के स्थान पर कोर्स लिखा था। एमबीबीएस-एमएस कोर्स दर्ज था। युवक को पुलिस को सूचना दे दी। पूछ ताछ में युवक ने खुद को गोयल इंस्टीट्यूट से फार्मेसी कोर्स करने का दावा किया। पूछताछ में युवक ने यह भी बताया कि वह ट्रॉमा में अपने परचित को देखने आया था। युवक को मरीज को पास ले कर पहुंचे तो मरीज ने युवक को पहचानने से ही इनकार कर दिया। पूछताछ में युवक पर मरीजों की दलाली का शक जाहिर किया। युवक को पुलिस के हवाले कर दिया।