जटिल सर्जरी भी लेप्रोस्कोपिक तकनीक से : प्रो. सोनकर

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सामान्य ही नहीं जटिल सर्जरी भी लेप्रोस्कोपी तकनीक से किये जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष में हेड एण्ड नेक कैंसर, हार्निया, ब्रोस्ट सर्जरी (एमआरएम), कोलेसिस्टेक्टोमी व आहार नली के कई जटिल सर्जरी लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किये गये। जनरल सर्जरी विभाग के प्रमुख डा. अभिनव अरूण सोनकर का दावा है कि केजीएमयू के सर्जरी विभाग दूरबीन विधि (लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) तकनीक संजय गांधी पीजीआई से भी आगे चल रहा है।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय सर्जरी विभाग के 108वें स्थापना दिवस की पत्रकार वार्ता में प्रो. सोनकर ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह पर एजुकेशनल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आगामी 10-15 फरवरी के बीच होने वाले समारोह में केजीएमयू, संजय गांधी पीजीआई, मेदांता व कामण्ड हॉस्पिटल के चिकित्सक सर्जरी की बारीकियां बताएंगे। समारोह में विशेषज्ञ ब्रोस्ट कैंसर व ओरल कैंसर में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के प्रयोग की जानकारी देंगे। इस अवसर पर पीजीआई के प्रो. अमित अग्रवाल प्रो. टीसी गोयल गेस्ट लेक्चर देंगे। झांसी के एमएलबी मेडिकल कालेज के प्रो. राजीव सिन्हा प्रो. एससी मिश्रा व्याख्यान देंगे। इस अवसर पर मुम्बई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रो. अभय दलवी का भी व्याख्यान होगा।

प्रो. सोनकर ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में विभाग में दूरबीन विधि से होने वाली सर्जरी की संख्या काफी बढ़ गयी हैं। बीते एक वर्ष में हेड एण्ड नेक की 56 सर्जरी तथा 883 कोलेसिस्टेक्टोमी की गयीं। ब्रोस्ट कैंसर की 86 सर्जरी तथा 64 लेप्रोस्कोपिक टोटली एक्सट्रापेरीटोनियल हार्नियोप्लास्टी की गयीं। उन्होंने बताया कि लेप्रोस्कोपी तकनीक सर्जरी की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे गरीब मरीजों को काफी लाभ हो रहा है। इस लेप्रोस्कोपी तकनीक विधि से सर्जरी का खर्च कम आता है तथा मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी जल्द मिलती है और मरीज अपने सामान्य कार्य कर सकता है। समारोह के दौरान विभाग की रिपोर्ट प्रस्तुत की जायेगी तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों का सम्मान होगा।

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