जांच एक तो रिपोर्ट अलग क्यों….

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लखनऊ । बीमारियों में जांच के दौरान भारत व आस-पास देशों में पैथालॉजी जांच रिपोर्ट अलग- अलग हो जाती है। इसका प्रमुख कारण समान मानक होना चाहिए। बायोके मिस्ट्री की विभिन्न जांच में हीमोग्लोबिन सहित जांच में रिपोर्ट अलग -अलग आने से लाइन आफ ट्रीटमेंट सही नहीं बन पाती है। पैथालाजिकल जांच रिपोर्ट अलग क्यों आती है, इसके विभिन्न कारणों को हर स्तर पर परखने के लिए एसीबीआई द्वारा पिछले 35 सालों से लगातार काम कर रही है। यह भारत ही नहीं बल्कि नेपाल व बंाग्ला देश में भी किया जा रहा है। यह जानकारी सम्मेलन के सचिव प्रो. अब्बास अली मेंहदी ने दी। डा. मेंहदी सोमवार को एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्स के 44 वेंं राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। सम्मेलन में प्रो.अब्बास अली मेंहदी ने एसीबीआई के नए सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया।

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उन्होंने बताया कि एसीबीआई द्वारा क्वालिटी प्रोग्राम चलाया जा रहा है, जिसमें हर्मोन्स से लेकर हीमोग्लोबिन आदि के मानक को तय किया जा रहा है। जो सभी जगह एक हो, वहीं वोलेबिया से आये डा.जुबिएता ने बताया कि ऊंचे पर्वतों पर शोध कार्य किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में स्पेस में भी कम ऑक्सीजन व शरीर के आंतरिक परिवर्तन होने से लोग कैसे रह सकेगे। इसका अध्ययन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान लोगों के लाल रक्त कणिकाओं में अंतर देखने को मिलता है। इसी तरह का अंतर स्पेस में रहने के दौरान लाल रक्त कणिकाओं में दिखाई पड़ता है, जिसके लिए तकनीक इजाद की गयी है। सम्मेलन के मुख्य अतिथि केजीएमयू कु लपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने कहा कि सम्मेलन में 40 से अधिक शोध प्रकाशित किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि यह एक मात्र विभाग है जिसमें लेड विषाक्तता की जांच के लिए उच्च स्तरीय प्रयोगशालाएं है।

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