लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के किचन में तो तीन डाइटीशियन की तैनाती की गयी है, लेकिन कैंसर, बाल रोग विभाग सहित वाह्य रोग विभाग ( ओपीडी) में कोई डाइटीशियन नहीं है,जहां पर मरीज इलाज के दौरान किस प्रकार की डाइट ले आैर कब ले। इसके लिए परेशान रहते है। केजीएमयू प्रशासन का तर्क है कि किचन में भोजन निर्माण में ध्यान रखना होता है। इसके लिए वहां पर तीन डाइटीशियन की तैनाती की गयी है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एस एन शंखवार का कहना है कि डाइटीशियन के काम के अनुसार की किचन में तैनाती है।
केजीएमयू में कुल छह डाइटीशियन है। इनमें तीन डाइटीशियन को किचन में तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा किचन में एक संविदा पर भी डाइटीशियन तैनात है। इन डाइटीशियन की भूमिका मरीजो को दिये जाने वाले भोजन में गुणवत्ता की जांच करना है। इसके अलावा एक -एक डाइटीशियन कार्डियक विभाग, मेडिसिन विभाग आैर नेफ्रोलॉजी में तैनात की गयी है। केजीएमयू के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ओपीडी में एक डाइटीशियन तैनात कर दी जाए तो मरीजों को बहुत राहत मिलेगी कि डाक्टरों से इलाज के दौरान क्या खाये आैर क्या नहीं।
अक्सर ओपीडी में आने वाले मरीज डाक्टर को दिखाने के बाद इस बात से परेशान रहते है कि वह लोग दवा का सेवन करने के दौरान क्या खाये आैर क्या नहीं। इसके अलावा कैंसर यूनिट में भी मरीज इलाज के दौरान परेशान रहते है कि प्रतिदिन क्या डाइट ले आैर प्रोटीन व विटामिन के लिए क्या खाये, ताकि इम्यूनसिस्टम बढ़ता रहे। इसी प्रकार बाल रोग विभाग में बच्चों के अभिभावक परेशान रहते है कि बच्चों को क्या खिलाये आैर क्या नहीं।
केजीएमयू के लोगों का मानना है कि किचन में संविदा मिला कर चार डाइटीशियन तैनात कर दी गयी। लोगों का मानना है कि किचन से एक दो डाइटीशियन हटा कर ओपीडी में व अन्य आवश्यक स्थानों पर तैनात की जा सकती है।विर की लोगों ने काफी प्रशंसा करते हुए कहा कि शिविर में सभी प्रकार की विधा के डाक्टर मौजूद थे। शिविर में योग सत्र का भी आयोजन किया गया।
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