इसको समाप्त करने के लिए होना होगा एक जुट

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लखनऊ । एड्स और टीबी को समाप्त करने के लिए और मजबूती से काम करना होगा। इसके लिए अब एड्स अधिनिमय 2017 और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 को भारत सरकार ने पारित कर दिया है, इसके तहत एचआईवी और टीबी से संक्रमित हर व्यक्ति को बिना विलम्ब जांच व सही इलाज मिलना जरूरी है। यह बात एड्स सोसाइटी ऑफ इण्डिया के राष्टï्रीय अध्यक्ष डा.इश्वर गिलाडा ने बृहस्पतिवार को केजीएमयू के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग में टीबी और एड्स के रोकथाम विषय पर आयोजित कार्यशाला में दी।

डा इश्वर गिलाडा उन डाक्टरों में शामिल है जब भारत में 1986 के दौरान पहला एचआईवी से संक्रमित रोगी सामने आया था। डा.इश्वर गिलाडा ने कहा कि 2016 तक लगभग 21 लाख एचआईवी संक्रमित रोगियों में से 67 प्रतिशत रोगियों को ही पता था कि उन्हें एचआईवी है। 14 लाख एचआईवी संक्रमित रोगियों को जिन्हे संक्रमण की जानकारी थी, उनमें से 10 लाख अधिक रोगियों को जीवन रक्षक दवा मिल रही थी। भारत में अभी भी 30 प्रतिशत से अधिक एचआईवी संक्रमित लोगों को संक्रमण की जानकारी ही नही है। उन लोगों तक जांच व दवा पहुंचान बहुत जरूरी है।

केजीएमयू के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष व नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.सूर्यकांत ने कहा कि लेटेंट टीबी जो जनसमुदाय के एक तिहाई लोगों को है। इससे आने वाले समय में टीबी रोग होने का खतरा बना हुआ है। इस बिमारी पर अंकुश लगाने के लिए और अधिक शोध की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मौजूदा समय में टीबी के नए रोगी दर में गिरावट इतनी कम है कि 2184 से पहले इस बीमारी से निजात नहीं मिल पायेगा।

यदि 2015 तक इस बीमारी से निजाता पाना है तो दस गुना तेजी से काम होना चाहिए। कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति प्रो . एमएलबी भट्ट मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ पत्रकार अशोक रामस्वरूप तथा विभाग के प्रो.संतोष कुमार भी उपस्थित रहे।

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