लखनऊ. सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव कराना महिलाओं के लिए मुश्किल होता जा रहा है. एंटीबायोटिक सहित अन्य दवाओं की कमी के चलते ज्यादातर सामान बाहर से लाने को मजबूर है. अगर तीमारदारों की माने सिजेरियन डिलीवरी के बाद दी जाने वाली एंटीबायोटिक सहित कई महत्वपूर्ण दवाएं मौजूद नहीं रहती है. यहां तक ऑपरेशन के लिए कभी-कभी टांका लगाने के लिए धागा भी लाना पड़ता है. तीमारदार का आरोप है कि कुछ सामान्य दवा ही अस्पताल में मौजूद रहती है महंगी दवा तो बाहर से ही लानी पड़ती है.
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा बनाए गए पोर्टल में दवा का जिक्र ही नहीं है. इसलिए दवा का मिलना मुश्किल हो जाता है. बताया जाता है कुछ जगह तो आयरन बी कांपलेक्स मौजूद नहीं है. लगातार दवाओं की कमी के चलते कई बार अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य महानिदेशालय को पत्र भी लिखा है परंतु महानिदेशालय यह कह कर टाल देता है कि उसको दवा लेनी है और कमी बनी हुई है वह दवा का पंजीकरण करा कर दवा ले सकता है.
बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग फिलहाल दवाओं की कमी को दबाने की कोशिश कर रहा है और हर जगह दवा होने का दावा करता आ रहा है.












