लखनऊ – उच्च न्यायालय ने एक स्पष्ट आदेश पारित किया है जिसमें कहा गया है कि पैथालॉजी या रोग निदान के जांच की रिपोर्ट को केवल एमसीआई पंजीकृत पैथालॉजिस्ट ही प्रमाणित कर सकता है। इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने मुख्यमंत्री व प्रशासन को पत्र लिख कर बिना पैथोलॉजिस्ट चल रहे जांच केंद्रों पर तुरन्त कार्रवाई करते हुए बंद कराने की मांग की गई है। आईएमए की ओर से मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, चिकित्सा महानिदेशक, जिलाधिकारी व सीएमओ को पत्र लिखकर बिना पैथोलॉजिस्ट, लैब टेक्नीशियन व लैब असिस्टेंट के भरोसे चलाई जा रहे सभी पैथालॉजी केंद्रों पर कड़ी कार्रवाई कर बंद कराने की मांग रखी है।
यह जानकारी आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि बिना पैथोलॉजिस्ट जांच कर उसकी रिपोर्ट तैयार कर के देना न केवल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम का उल्लंघन है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी है। उन्होंने बताया कि पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट पर साइन करने के लिए केवल एक पैथोलॉजी में एमडी, डीएनबी या डीसीपी डिग्री धारक ही अधिकृत है। इसके अलावा न तो एलटी, एलए या कोई अन्य डॉक्टर इस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता है।
डॉ. अमित रस्तोगी ने कहा कि इसके लिए मरीजों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। जांच कराते समय मरीज को देख लेना चाहिए कि जिस सेंटर में वो गया है वहां पैैथोलॉजिस्ट है कि नहीं। जांच रिपोर्ट पर साइन है या नहीं, अगर है तो किसकी साइन है। यह जानकारी ली जा सकती है।
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