98.8% मरीज हुए ठीक
kgmu, PGI सहित देश के 5 शीर्ष मेडिकल संस्थानों की संयुक्त पहल
लखनऊ। भारत के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। देश के पांच प्रमुख सरकारी अस्पतालों में किए गए बहुकेंद्रित नैदानिक परीक्षण (RESOLVE) के परिणाम विश्व की प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका ‘द लैंसेट’ (इम्पैक्ट फैक्टर 109) में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन के अनुसार, हेपेटाइटिस-C वायरस (HCV) का प्रभावी इलाज अब 12 सप्ताह के बजाय केवल 8 सप्ताह की दवा से संभव है।
इलाज के खर्च और समय में आएगी बड़ी कमी
वर्तमान में विश्वभर में हेपेटाइटिस-C के इलाज के लिए सोफोसबुविर-वेलपाटासविर (Sofosbuvir-Velpatasvir) दवा के संयोजन की 12 सप्ताह की खुराक दी जाती है, जो कि काफी महंगी पड़ती है। इस नई खोज से न केवल मरीजों के इलाज का समय घटेगा, बल्कि दवा का आर्थिक बोझ भी काफी कम होगा।
अध्ययन के मुख्य आंकड़े:
8 सप्ताह का उपचार: 98.8% मरीज पूरी तरह स्वस्थ हुए।
12 सप्ताह का उपचार (मानक): 99.0% सफलता दर दर्ज की गई।
मरीजों की संख्या: 880 मरीज (5 प्रमुख अस्पतालों से)।
रिसर्च फंडिंग: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा 1.65 करोड़ रुपये।
देश के 5 शीर्ष मेडिकल संस्थानों की संयुक्त पहल
इस अध्ययन में देश के पांच प्रतिष्ठित संस्थानों के विभागों ने हिस्सा लिया:
SGPGI, लखनऊ (हेपेटोलॉजी विभाग)
KGMU, लखनऊ (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग)
BHU-IMS, वाराणसी (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग)
AIIMS, नई दिल्ली (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग)
जी.बी. पंत अस्पताल, नई दिल्ली (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग)
दिग्गज विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पूरा हुआ शोध
यह संपूर्ण अध्ययन ICMR मुख्यालय, नई दिल्ली के प्रोफेसर राकेश अग्रवाल और SGPGI के निदेशक डॉ. आर. के. धीमन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शोध के प्रमुख समन्वय और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी SGPGI के प्रोफेसर अमित गोयल तथा KGMU के डॉ. सुमित रुंगटा ने निभाई। उन्होंने बताया कि यह शोध हेपेटाइटिस सी के इलाज में नया आयाम स्थापित करेगा, मरीज से जल्दी राहत मिलेगी. वहीं अध्ययन के सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis) का कार्य CSIR-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CDRI), लखनऊ के डॉ. आशीष अवस्थी ने संभाला












