लखनऊ । बढ़ते कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण लोग डिप्रेशन में आने लगे हैं। इस डिप्रेशन में कोरोना संक्रमण का डर और सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का निदान ना होने से डिप्रेशन, उलझन, घबराहट, नींद ना आना, चिड़चिड़ापन आदि लक्षण आने लगे हैं। इंडियन सायक्रेटिक एसोसिएशन के एक सर्वेक्षण के अनुसार वर्तमान परिवेश में तीन पुरुषों में एक पुरुष और 4 महिलाओं में एक महिला मानसिक तनाव, उलझन चिड़चिड़ापन नींद ना आने की शिकार है। एसोसिएशन के सदस्य डॉ देवाशीष शुक्ला ने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के डर ने लोगों के मन में अनिश्चितता का माहौल बना रखा है। लोग दूसरी लहर के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे। इस पर संक्रमण की तेजी में ऑक्सीजन की कमी ने आग में घी का काम किया। इलाज की व्यवस्था और भविष्य को लेकर लोगों को मानसिकता तनाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर शरीर परिवार और संबंधों का दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया लोगों को इलाज के लिए एसोसिएशन ने दो महत्वपूर्ण दवाओं को दिए जाने की संस्तुति कर दी है। ताकि लोग इसको स्थानीय डॉक्टर के परामर्श पर दिक्कत के अनुसार ले सकते हैं। उन्होंने बताया सेटेरालाइन 50 एमजी,कोलेनाजीपाम.25 एमजी दवा का सेवन किया जा सकता है। डिप्रेशन का असर शरीर, दिमाग़ और व्यवहार पर पड़ता है। शरीर पर प्रभाव- जल्दी जल्दी सिरदर्द, थकान, और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव. भावनात्मक प्रभाव में चिंता, ग़ुस्सा, चिड़चिड़पना और उलझन हो सकती है. मानसिक प्रभाव– बार-बार नकारात्मक विचार आना, जैसे मेरी नौकरी चली गई ,तो क्या होगा, परिवार का पालन पोषण कैसे होगा, मुझे कोरोना वायरस हो गया तो क्या करेंगें। व्यवहारिक प्रभाव – ऐसे में लोग अल्कोहल का सेवन, तंबाकू, सिगरेट का सेवन ज़्यादा करने लगते हैं, कोई दिन रात टीवी देखने लगता है, कोई ज्यादा चीखने-चिल्लाने लगता है, तो कोई मौन साध लेता है।
कैसे दूर होगा तनाव का प्रभाव
मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है वरना तनाव अंतहीन हो सकता है. डॉ. देवाशीष शुक्ला का कहना है कि आप कुछ तरीक़ों से ख़ुद को शांत रख सकते हैं।
ख़ुद को मानसिक रूप से मज़बूत होना आवश्यक है,आपको ध्यान रखना है कि सबकुछ फिर से ठीक होगा, बस धैर्य के साथ इंतज़ार करें।
आपसी रिश्तों को मज़बूत करें, छोटी-छोटी बातों का बुरा ना मारना चाहिए। कम्युनिकेशन गैप ना करके एक-दूसरे से बातें करें और सदस्यों का ख़्याल रखें. निगेटिव विषय बातों पर चर्चा कम करें।
घर से बाहर नहीं निकले, लेकिन छत पर, खिड़की पर, बालकनी में जाकर खड़े हों। खुली हवा में फील गुड लगता है
अपनी दिनचर्या को बनाए रखें. इससे सामान्य महसूस होता है. हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें। इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबी पूरी करने में करे।












