लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पटरी मेडिसिन विभाग में फेफड़े की कार्यक्षमता के परीक्षण के लिए पहला इम्पल्स ऑसिलोमीटर जांच शुरू हो गयी। बताया जाता है कि यह प्रदेश का पहला इम्पल्स ऑसिलोमीटर है, जोकि मरीज के गुणों को मापकर श्वसन रोगों के निदान के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है।
वर्चुवल संगोष्ठी की शुरुआत डॉ सजल डे पल्मोनरी मेडिसिन विभाग, एम्स, रायपुर द्वारा इम्पल्स ऑसिलोमीटर पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इस नयी निदान पद्धति के उपयोग के बारे में विभाग के फ़ैकल्टी, रेजीडेंट डॉक्टर्स, संकाय कर्मचारियों को विस्तार पूर्वक बताया। डॉ डे ने बताया कि इस उपकरण का प्रयोग आसानी से किया जा सकता है , इसलिए इसका उपयोग छोटे बच्चों और बुजुर्ग लोगों में भी किया जा सकता है। ऐसे लोग जो उन प्रक्रियायों को करने में सक्षम नहीं हैं, जिनमें तेज़ी से सांस लेने की आवश्यकता होती है, बेडरेस्ट और आईसीयू रोगियों में भी इसका उपयोग आसानी से किया जा सकता है।
इस सत्र के बाद डॉ सूर्यकांत प्रमुख , श्वसन चिकित्सा विभाग ,जो आईएमए-एएमएस ने कहा कि इम्पल्स ऑसिलोमेट्री मशीन का उद्घाटन करते हुये कोविड- 19 युग में इस तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस मशीन से फेफड़ों की कार्यक्षमता को मापते समय न्यूनतम एयरोसोल उत्पन्न होता है। डॉ सूर्यकांत ने कहा कि यह प्रारंभिक चरण में सांस की बीमारियों का निदान करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही एक स्वस्थ आदमी पर इम्पल्स ऑसिलोमेट्री की प्रक्रिया का तकनीकी प्रदर्शन भी सब के सामने कार्यक्रम में किया गया।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के श्वसन चिकित्सा और बाल रोग विभागों के लगभग तीस स्नातकोत्तर छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। डॉ राजीव गर्ग श्वसन चिकित्सा विभाग, केजीएमयू, कोऑर्डिनेटर डॉ अजय कुमार वर्मा श्वसन चिकित्सा विभाग, डॉ सारिका गुप्ता थे।












