लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लॉरीकार्डिंयोलॉजी में डॉक्टरों पर एक बार फिर इलाज में लापरवाही बरतने से मरीज की मौत होने का आरोप लगा है। मरीज की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार को मरीज के स्टंट डालने के नाम पर लगभग 72 हजार रुपए जमा कराये गये। उनका आरोप है स्टंट डालने दौरान तकनीकी चूक हो गयी अौर इस कारण मरीज के आंतरिक भाग में ब्लीडिंग होने लगी। हालत बिगड़ने पर मरीजों को डाक्टरों ने दोबारा ओटी में ले जाकर सर्जरी करके आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। जहां मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। केजीएमयू प्रशासन के अनुसार लॉरीकार्डिंयोलॉजी विभाग के डाक्टरों ने इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती है।
पुराने लखनऊ निवासी कमरुद्दीन के बेटे निजामुद्दीन (35) शुक्रवार को कार्डियक दिक्कत होने पर सुबह लॉरी कार्डियोलॉजी ले आये। यहां पर डॉक्टरों ने जांच पड़ताल भर्ती किया आैर ब्लॉकेज होने के कारण स्टंट डालने के लिए बताया। उनके परिजन इरफाना वारसी का आरोप है कि स्टंट डालने में ऑपरेशन बाद करीब दो बजे मरीज को ओटी से बाहर लाया गया था। उस वक्त मरीज बातचीत कर रहा था, लेकिन कुछ देर बाद अचानक मरीज को उल्टी होने लगी। इसकी जानकारी डाक्टरों को दिया गया तो चेक किया।
इसके बाद आनन-फानन में बिना तीमारदारों को बताए ही दोबारा ओटी में ले कर चले गये। पूछताछ करने पर कुछ नहीं बताया। इसके बाद मरीज को करीब सात बजे ओटी से बाहर किया गया। तीमारदारों ने डॉक्टर से इलाज के बारे में जानकारी पूछी तो सभी को बाहर कर दिया आैर मरीज को गंभीर हालत में आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। बहन इरफाना वारसी का कहना है कि डॉक्टरों ने पेट में चीरा लगाकर उसमें रुई से पेट आस पास जमे खून को निकाले थे। बहन का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से रक्तस्त्राव होने लगा था आैर आंतरिक भाग में ब्लीडिंग होने लगी।
बहन इरफाना का आरोप है कि मरीज की मौत करीब नौ बजे हो चुकी थी। इसके बाद भी डॉक्टरों ने मृत घोषित नहीं किया। काफी देर इंतजार बाद रात करीब 11:30 बजे तीमारदार डॉक्टर पास गए तो उन्होंने मौत होने की जानकारी दी। इसे लेकर तीमारदारों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया।
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