लखनऊ। प्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति सबसे सर्व सुलभ है। इन दवाओं का साइड इफेक्ट भी नहीं है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की समस्याओं को सरकार दूर करने का प्रयास करेगी। वह शनिवार को इन्दिरानगर स्थित होटल बेबियान इन में आयोजित होम्योपैथी सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री ने कहा कि पहले गांवों के लोग भी होम्योपैथी की जानकारी रखते थे। किसी को समस्या होने पर उपचार करते थे। मुकुट बिहारी वर्मा ने कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग अपने बच्चे को डाक्टर ही बनाना चाहता है। केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के सदस्य डा. अनुरूद्ध वर्मा ने बोलते हुए नारा दिया, सबका साथ होम्योपैथी के साथ उन्होंने सरकार से मांग की कि बंगाल व पंजाब में होम्योपैथी छात्रों को इन्टर्नशिप के दौरान प्रतिमाह 22 हजार रूपये देती है, जबकि उत्तर प्रदेश में महज 7500 रूपये ही मिलते हैं। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। डा. वर्मा ने कहा कि पिछले सात साल में पूरे उत्तर प्रदेश में एक भी होम्योपैथी अस्पताल नहीं खोला गया है। इससे यह सिद्ध होता है कि यहां की सरकारें होम्योपैथी के विकास को लेकर गंभीर नहीं हैं।
होम्योपैथी के पूर्व निदेशक डा. बी.एन.सिंह ने कहा कि विदेशों में फार्मा कंपनियों ने साजिश के कारण होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को मिटाने का काम किया। इसके खिलाफ एलोपैथिक दवा कंपनियों ने गलत प्रचार किया। उनको लगने लगा था कि अगर होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति अगर प्रचलित हो जायेगी तो अन्य विद्याओं की दवा का बाजार चौपट हो जाएगा।
होम्योपैथ डाक्टरों ने प्रमुख मांगें प्रस्तुत की
- उत्तर प्रदेश के होम्योपैथी मेडिकल कालेज शिक्षकों एवं अन्य संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें भरा जाये।
- राजकीय होम्योपैथिक अस्पतालों में विद्युत, स्टाफ एवं औषधियों की कमी हमेशा रहती है।
- होम्योपैथी के छात्रों का इन्टर्नशिप भत्ता बढ़ाया जाये।
- जिन क्षेत्रों में होम्योपैथी की लोकप्रियता है वहां सरकारी होम्योपैथिक अस्पताल खोले जायें।
कार्यक्रम में होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष डा. वीरेन्द्र बहादुर सिंह, सेन्ट्रल कौंसिल आफ होम्योपैथी के मेम्बर डा.भक्त वत्सल, डा. आशीष वर्मा और डा. अजय कुमार यादव प्रमुख रूप से उपस्थित थे।












