– जानलेवा हमले से कट गई थी गला और सांस की नली
लखनऊ। एक तरफ कोरोना के संक्रमण का खतरा था तो दूसरी तरफ मरीज को जान का खतरा था। किंग जॉर्जव चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने विभाग प्रमुख डॉक्टर संदीप तिवारी के साथ डॉक्टर समीर मिश्रा के साथ संक्रमण से बचाव को ध्यान में रखते हुए मरीज की तत्काल गले की सर्जरी करने का निर्णय लिया। दरअसल 19 वर्षीय युवक का गला धारदार हथियार से हमले के बाद कट गया था। श्वास नली कटने के कारण मरीज का जीवन खतरे में पड़ा हुआ था। आक्सीजन का लेबल भी काफी गिर गया था। ऐसे में डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए मरीज को पीपीई किट व एन-95 मास्क पहना कर उसका प्राथमिक परीक्षण व उपचार शुरू कर दिया। जांच में पता चला कि उसके सांस की नली (ट्रैकिया) कट गई है। इसके साथ ही आहार नाल में भी घाव होने की आशंका थी। तुरंत मरीज की कोविड जांच कराने के लिए सैंपल दिया गया । इसके बाद डॉक्टरों ने विचार-विमर्श करके बिना समय गंवाए जख्म वाले स्थान से सांस लेने के लिए नली डाल दी। इसके बाद कई दिन तक दवाएं देकर मरीज की स्थिति सामान्य होने पर उसका जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया । अब मरीज डिस्चार्ज होने को तैयार है।
डॉक्टर संदीप ने बताया बलरामपुर के रतोही गांव निवासी रिंकू तिवारी पुत्र छोटे लाल तिवारी को 10 सितंबर को सुबह गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर लाया गया था। जहां डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. समीर मिश्र मरीज की हालत देखते हुए डॉ. यादवेन्द्र की टीम के साथ इमरजेंसी में सर्जरी करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया यह प्रक्रिया एयरोसॉल जनरेटिंग थी, टीम को जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता था। मगर डॉ. यादवेन्द्र धीर ने कोविड का खतरा उठाते हुए ट्रैकियोस्टोमी किया। बीच-बीच में मरीज की हालत ज्यादा अस्थिर होने पर कुछ दिनों के लिए सर्जरी को टाल कर दवाओं से मरीज को सर्जरी करने की स्थिति में लाया गया।
ट्राम सर्जरी के सीनियर रेजिडेंट डॉ. हर्षित अग्रवाल ने टीम के साथ मिलकर तीन घंटे तक जटिल सर्जरी किया। सर्जरी में क्षतिग्रस्त सांस की नली, आहार नली, मांशपेशियों व खून की धमनियों को को ठीक किया गया। इसके बाद सात घंटे तक मरीज की मॉनीटरिंग की गई। अभी मरीज ट्रैकियोस्टोमी पर है, लेकिन जख्म भर जाने से पूरी तरह घर जाने के लिए ठीक है.












