हल्दी दूध चोट नहीं, स्तन कैंसर से भी है बचाता

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लखनऊ। अक्सर चोट लगने हल्दी दूध का सेवन कि या जाता है, लेकिन यह हल्दी दूध स्तन कैंसर से भी बचा सकती है। अगर प्रतिदिन दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से खतरे को दूर किया जा सकता है। यही नहीं अगर स्तन कैंसर हो जाए तो तब यह हल्दी दूध उसे आगे बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जानकारी मेरठ से आयी एंडोक्राइन सर्जन डॉ. शुभी अग्रवाल ने किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जनरल सर्जरी विभाग के 108 वें स्थापना दिवस समारोह से पूर्व आयोजित कार्यशाला में दी। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हल्दी में करक्यूमिन तत्व कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। यही नहीं कैंसर कोशिकाओं के निर्माण को रोकता है। उन्होंने महिलाएं नियमित तौर पर हल्दी का सेवन करती हैं। उनको स्तन कैंसर होने की आशंका कम रहती है। कार्यशाला में डॉ. संदीप कुमार वर्मा, प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एके सिंह व डॉ. रिचा श्रीवास्तव मौजूद थी।

डॉ. शुभी ने बताया कि देखा गया है कि स्तन कैंसर का बड़ा कारण देरी से शादी होता है। सही उम्र में शादी न होने से शरीर में हार्मोन का असंतुलन होता है। स्ट्रोजन हार्मोन का असर स्तन की कोशिकाओं पर अधिक पड़ता है, जबकि प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन ठीक से काम नहीं कर पाता है। इसके कारण स्तन कैंसर को बढ़ावा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि पांच सेंटीमीटर तक की गांठ का ऑपरेशन के बाद कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी की जा सकती है।

दिल्ली स्थित जीपी पंत हॉस्पिटल के डॉ. एचएच नाग के मुताबिक गॉल ब्लेडर का कैंसर के मामले बढ़ रहे है। अभी तक 45 साल की उम्र के बाद लोग इस कैंसर की चपेट में आते थे। अब कम उम्र के लोग इससे पीड़ित हो रहे हैं। लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सटीक ऑपरेशन संभव है। गॉल ब्लेडर के कैंसर से पीड़ित 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में पथरी पाई जाती है। लिहाजा पथरी के इलाज में हीलाहवाली न बरतनी चाहिए। सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अभिनव अरूण सोनकर ने कहा कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायराइड विकार 10 गुना ज्यादा होता है। इसकी मुख्य वजह महिलाओं में ऑटोम्यून्यून की समस्या ज्यादा होना है। थायराइड हार्मोन शरीर के अंगों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं। असंतुलन पर समस्या खड़ी हो जाती है। उन्होंने बताया कि सर्जरी से अब थायराइड का सटीक इलाज संभव है।

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