गर्मी और लू से बचाव के लिए शीतली प्राणायाम

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न्यूज। योग विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और लू से बेहाल लोगों को शीतली प्राणायाम राहत दे सकता है।
योग गुरू गुलशन कुमार ने रविवार को बताया कि मानव शरीर में चन्द्र नाड़ी शरीर को ठंडक प्रदान करती हैं। जीवन पर्यन्त श्वांस नासिका के दो छिद्रों से हमारे भीतर प्रवाहित होती रहती है। बांयी नासिका छिद्र को चन्द्र स्वर यानि इडा नाडी कहते है जबकि दाये छिद्र को सूर्य स्वर यानि पिंगला नाडी कहते है। चन्द्र स्वर से यदि सांस आती जाती हो तो शरीर को ठंडक मिलती है और यदि सूर्य स्वर यानि दाहिनी नासिका से सांस आती जाती है तब तो शरीर में गरमी पैदा होती है ।

उन्होने बताया कि इस भीषण गर्मी में जब तापमान 40 से 48 डिग्री सेल्सियस पहुँच रहा है,ऐसे में तेज गरम हवाएं और हीट वेव से लू लगने का खतरा बढने लगता है। इसके कारण हमारे शरीर से पसीना निकलने से पानी व नमक की कमी के कारण शरीर का तापमान बढने से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ जाता है । ऐसे में यदि योग की प्राणायाम की श्वास क्रिया की जाए तो ही स्ट्रोक की रोकथाम की जा सकती है।

योग गुरु ने बताया कि यदि शरीर का तापमान बढा हुआ है और वह 104 डिग्री फोरनहाइट तक है तो सम्भावना है कि हीट स्ट्रोक है। हीट स्ट्रोक होने पर चक्कर आना, उल्टी आना , बेहोशी आना , मांसपेशियों मे ऐठन आना, सांस लेने में कठिनाई आदि लक्षण आ सकते है। उन्होने बताया कि हीट स्ट्रोक से बचने के लिए योग का अभ्यास से बचा जा सकता हैं लेकिन यदि पहले से ही यौगिक प्राणायाम किया जाए तो हीट स्ट्रोक से बचाव किया जा सकता है। शीतली प्राणायाम, शीत्कारी प्राणायाम ,चन्द्र भेदी प्राणायाम लाभप्रद होते है जिससे लू लगने बचाव किया जा सकता है।
श्री कुमार ने बताया कि शीतली प्राणायाम को करने के लिए साफ हवादार स्थान पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाए तत्पश्चात जीभ मुंह से निकालकर उसे गोल पाइपनुमा बनाकर श्वास भीतर शनै: शनै: खीचे और धीरे धीरे दोनो नासिका रन्ध्रों से निकाल दे। यह अभ्यास बारम्बार करीब पांच से दस मिनट करे। ऐसा करने पर मुँह में ठडक मिलती है व तापमान नियंाण होता है।

शीतली प्राणायाम में ऊपर व नीचे के दांतो को मिलाकर वायु भीतर खींचे फिर नासिका से छोड दे। यह क्रिया भी बारम्बार करे। इससे मुख को शीतलता मिलेगी व तापमान कम करने में सहायता मिलेगी । उन्होने बताया कि चन्द्र भेदी प्राणायाम के लिये पद्मासन में या सुखासन में बैठ जाए। दाये नासिका स्वर को दाये अंगुठे से बन्द करे फिर बायें नासिका चन्द्र स्वर से गहरी लम्बी श्वास भरे अपनी क्षमता के अनुसार रोक ले तत्पश्चात दायें सूर्य नासिका स्वर से श्वास को छोड दे । यह प्राणायाम शरीर को शीतलता प्रदान करता है व शरीर के तापमान को सन्तुलित रखता है।

योग गुरू ने बताया कि हीट स्ट्रोक लगने पर रोगी को चिकित्सा सहायता के लिए डाक्टर की मदद लेनी चाहिए।
शरीर को तौलिये से स्पंज करे। यदि मरीज होश में है तो पानी बार बार पीने को दे। रोगी को ठंडी जगह पर ले जाकर लिटा दे । कच्चा प्याज,कच्चे आम का पना,तुलसी का रस,नींबू की शिकंजी लू और हीट स्ट्रोक से बचाव में कारगर मानी गयी है। इसके अलावा भोजन मे खीरा, खरबूजा, तरबूज , ककड़ी, मौसमी नारियल का पानी शामिल करना चाहिये।

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