लापरवाही : गर्भस्थ शिशु में धड़कन थी, बता दिया था बंद

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के क्वीनमेरी में हुई अल्ट्रासाउंड की जांच गलत करने का आरोप लगा है। आरोप है कि डॉक्टरों ने गर्भस्थ की धड़कन बंद होने की जानकारी गर्भवती को दी। इस पर परिजनों ने निजी केंद्र पर जांच करायी तो वहां पर शिशु की धड़कन चल रही थी। इस पर गर्भवती ने क्वीनमेरी पहुंचकर डॉक्टर व अन्य अफसरों से मामले की शिकायत करते हुए हंगामा कर दिया। बाद में गलती मान भी ली गयी। अस्पताल प्रशासन ने शिकायत पर जांच के निर्देश दे दिये है।

चौक निवासी सुमैया खातून आठ माह की गर्भवती हैं। उनका इलाज क्वीनमेरी में चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि बीते सोमवार को उन्होंने क्वीनमेरी में अल्ट्रासाउंड की जांच करायी, तो डॉक्टर ने गर्भस्थ की जान का खतरा बताया। कहा कि गर्भस्थ शिशु की धड़कने नहीं चल रही हैं। घबराई पीड़िता वरिष्ठ डॉक्टर के पास अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर बताया कि गर्भस्थ के दिमाग तक खून नहीं पहुंच रहा है, जिससे उसकी धड़कन सुनाई नहीं दे रही है। परिजनो ने बिना देरी किए हुए तुरंत ही निजी केंद्र पर अल्ट्रासाउंड व जांच कराई।

वहां की रिपोर्ट में गर्भस्थ पूरी तरह स्वस्थ बताया गया। धड़कने भी चलते हुए बतायी। इस पर परिजन क्वीनमेरी डॉक्टर के पास पहुंचे और गलत रिपोर्ट दिए जाने की बात कहते हुए विरोध किया तो डॉक्टर ने यह कहकर लौटा दिया कि वह दिन भर में कई रिपोर्ट देखती हैं, तो भूल हो जाती है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी जैसवार विभाग में डॉक्टरों पर दबाव ज्यादा है। प्रदेश भर से मरीज यहां आते हैं। हमने धड़कन रुकने की पुष्टि नहीं की। सिर्फ शंका के आधार पर मरीज को दोबारा जांच करवाने की सलाह दी थी।

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