गुर्दे की बीमारी अब बड़े बुजुर्गों को ही नहीं बल्कि नवजात शिशुओं को भी हो रही है। फोर्टिस हास्पिटल नई दिल्ली के नेफ्रोलोजिस्ट डा. संजीव गुलाटी के मुताबिक 100 में चार नवजात शिशुओं के गुर्दे खराब होते हैं। इसके लिए जरूरी है कि गर्भावस्था में ही प्रीनेटल अल्ट्रासाउण्ड जांच करानी चाहिए। वह लखनऊ के हयात होटल में कुपोषण की रोकथाम विषय पर पीजीआई द्वारा आयोजित गोष्ठी में शिरकत करने आये थे।
डा. संजय गुलाटी ने बताया कि बच्चों में बार-बार बुखार आने का महत्वपूर्ण कारण किडनी और मूत्रमार्ग का संक्रमण हो सकता है। कम उम्र के बच्चों में किडनी तथा मूत्रमार्ग के संक्रमण की देर से जानकारी मिलने से किडनी को नुकसान हो सकता है। कई बार किडनी पूर्णरूप से खराब हो जाने की संभावना भी रहती है।
बच्चों किडनी खराबी के लक्षण
- बच्चों में पहचान
- खून का न बनना।
- हड्डियां टेड़ी बनना।
- प्यास अधिक लगना।
- शरीर फूल जाना।
खाना बिल्कुल बन्द न करें गुर्दे के मरीज: डा. नारायण
संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) लखनऊ के नेफ्रो विभाग के प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि मात्र प्रोटीन छोड़ना और खाना कम खाना इसका इलाज नहीं है। इससे आदमी के शरीर में कमजोरी आ जाती है और अन्य बीमारियों का शिकार हो सकता है। डा. नारायण ने कहा कि हिन्दुस्तानियों में प्रोटीन की कमी वैसी भी बनी रहती है। गुर्दे की मरीजों को भूख लगना बन्द हो जाता है। गुर्दे खराब हो जाने की वजह से शरीर से खराब पदार्थ बाहर नहीं निकल पाता है।
पेशाब से प्रोटीन निकलने की कराएं जांच
कानपुर से आये गुर्दा रोग विशेषज्ञ डा. डी.के. सिन्हा ने बताया कि गुर्दे के मरीजों को चाहिए कि प्रारम्भिक अवस्था में ही पेशाब में प्रोटीन की जांच कराएं। इसके लिए माइक्रोएल्बुनियम टेस्ट होता है। इस जांच से गुर्दे की बीमारी का पता चल जाता है। प्र्रारम्भिक अवस्था में बीमारी का पता लगने से दवा से ही गुर्दे की बीमारी ठीक हो जाती है। डा. सिन्हा ने बताया कि अधिकांश मरीजों को बीमारी का पता तब चल पाता है जब उनका 50 प्रतिशत गुर्दा खराब हो चुका होता है। ऐसी अवस्था में डायलिसिस या ट्रान्सप्लान्ट ही एक मात्र उपाय है। सेमिनार की संचालिका व एसआरएनएम की सचिव व पीजीआई की नेफ्रोलोजी विभाग की प्रो. डा. अनीता सक्सेना ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशाला लखनऊ में पहली बार हो रही है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला में चिकित्सकों एवं आहारविदों के बीच गुर्दे के पोषण के अभ्यास का प्रसार किया जायेगा। दो दिवसीए इस कार्यशाला में ब्राजील, अमेरिका, मलेशिया,नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलूर, चण्डीगढ़ और कानपुर के गुर्दा रोग विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
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