लखनऊ। लोगों में लापरवाही के कारण दांतों की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। सबसे अधिक लोग दांतों में कीड़े लगने की दिक्कत से परेशान है। इसके बाद पायरिया दांतों में दिक्कत पैदा कर रहा है। इलाज में देरी या लापरवाही से दांतों को उखाड़ने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है। अगर समय पर इलाज किया जाए तो प्राकृतिक दांतों को बचा सकते हैं। अब नयी तकनीक और क्राउन आ गए हैं। ऐसे में मरीजों के दांतों को उखाड़ने के तुरंत बाद नकली दांत लगाए जा सकते हैं। यह बात अटल बिहारी वापजेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में इंडियन सोसाइटी ऑफ पेरियोडोन्टोलॉजी के आयोजित कार्यक्रम में पेरियोडॉन्टिक्स विभाग प्रमुख डॉ. नंद लाल ने कही।
कार्यक्रम में कार्यक्रम में कुलपति डॉ. बिपिन पुरी, दंत संकाय डीन डॉ. आरके सिंह आदि मौजूद रहे।
डा. नंद लाल ने कहा कि अभी छह से सात हजार रुपये में एक नकली दांत लग रहा है। यह खर्च घटाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार नये प्रयोग आैर संसाधनों पर रिसर्च किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नयी तकनीक के प्रयोग से तत्काल दांत लगाने के बाद मरीज को कोई परेशानी भी नही होती है।
केजीएमयू पेरियोडॉन्टिक्स विभाग के डॉ. पवित्र रस्तोगी ने कार्यक्रम में कहा कि अगर आंकड़ों को देखा जाए तो दांतों की बीमारी से जूझ रहे 50 प्रतिशत लोग पायरियाग्रस्त हैं। दांतों में कीड़े लगने की परेशानी 60 प्रतिशत लोगों में है। इन दोनों बीमारियों से दांत हिलने लगते हैं।इलाज न करने पर समय से पहले दांत को उखाड़ने की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि अभी तक दांतों को उखाड़ने और प्रत्यारोपित करने में एक सप्ताह लगता है। पहले 15 से 20 दिन घाव भरने में लग जाता था। अब उखाड़ने के तुरंत बाद दांत प्रत्यारोपित किया जा सकता है।डॉ. रामेश्वरी सिंघल के मुताबिक 200 पीजी छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।












