लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आठ वर्षीय बच्चे की हार्ट और फेफड़े की सर्जरी एक साथ करके चिकित्सा क्षेत्र में नया आयाम बना दिया है। सर्जरी के बाद बच्चा पूरी तरह से ठीक है तथा उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। इसमें पीडियाट्रिक, कॉर्डियोलॉजी, कॉर्डियक वस्कुलर थोरोसिक सर्जरी तथा एनीस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों ने टीम वर्क करते हुए सर्जरी को सफल बना दिया।
सीतापुर के सिधौली निवासी आठ वर्षीय बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से पीडियाट्रिक विभाग में ग्यारह जनवरी को भर्ती किया गया था। विभाग की प्रो. माला और डॉ. शालिनी की देखरेख में भर्ती मरीज की जांच में टेरोटोलॉजी ऑफ फेलट विद मेजर एआट्रो पल्मोनरी कोलाट्रेल्स बीमारी का पता चला। यह हार्ट की एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में हार्ट ठीक से क्रियाशील नहीं रहता है। फेफड़े की समस्या भी होने के कारण केस और गंभीर हो गया। मरीज की डबल जटिल बीमारियों की गंभीरता को देखते हुए पीडियाट्रिक, कॉर्डियोलॉजी, सीवीटीएस सर्जरी तथा कार्डियक एनीस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों ने एक साथ मिलकर इस बीमारी के निदान पर चर्चा की। डाक्टरों ने पाया कि मेजर एआट्रो पल्मोनरी कोलाट्रेल्स के कारण मरीज काफी गंभीर हो जाता है आैर ऐसे हालात में बच्चे की हार्ट सर्जरी करना बेहद जटिल हो सकता है।
इस पर सभी के एक मत से तय किया गया कि हार्ट और फेफड़े दोनों सर्जरी एक साथ की जाएं। सर्जरी की सभी प्रक्रिया होने के बाद एक मार्च को सुबह एनीस्थीसिया के प्रमुख प्रो. जीपी सिंह और डॉ.करन कौशिक के साथ सर्जरी शुरू की गयी। सबसे पहले कॉर्डियोलॉजी के डॉ. गौरव चौधरी और डॉ. अखिल शर्मा ने बच्चे के राइट फेफड़े की कॉइलिंग की। इसके बाद तत्काल दस मिनट के अंदर ही बच्चे की ओपन हार्ट सर्जरी की शुरू कर दी गयी। इसे डॉ. एसके सिंह , डॉ. सर्वेश कुमार और डॉ. राहुल ने किया।
इस दौरान बच्चे को हार्ट लंग मशीन पर सेट करके रखा गया, जहां पर महत्वपूर्ण काम ऑपरेटर मनोज और उनकी टीम ने सम्हाला। लगभग चार घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद बच्चे को अगले दस दिनों तक आईसीयू में विशेषज्ञ डाक्टरों की निगरानी में रखा गया। इस दौरान डॉ. शालिनी, डॉ. सर्वेश, डॉ. भूपेंद्र और डॉ. जीशान ने उस पर मानीटरिंग की। इसके बाद ग्यारह मार्च को बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।












