इस थेरेपी से होंठ के कैंसर का सटीक इलाज

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Teal ribbon awareness on doctor’s hand for Ovarian Cancer, Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) disease, Post Traumatic Stress Disorder (PTSD), Tourette's Syndrome, Obsessive Compulsive Disorder (OCD)

लखनऊ। होंठ के कैंसर के इलाज के लिए अब ब्रोकीथेरेपी से सरल हो गयी है। इस तकनीक से होंठ का आकार भी नहीं बदलेगा। पहले जहां एक मात्र सर्जरी ही कराना पड़ता था। अब इस तकनीक से गोमती नगर के डा.राम मनोहर लोहिया संस्थान में मरीजों का इलाज शुरू किया जा चुका है। बस्ती निवासी खुर्रम के होंठ में छोटा सा दाना निकला हुआ था। शुरुआती दौर में पहले तो खुर्रम ने दाने को नजरअंदाज कर दिया। जब दो सप्ताह के बाद भी दाना ठीक नहीं हुआ तो वे डॉक्टर के पास पहुंचे, तो डॉक्टरों ने कैंसर की आशंका की आैर उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। डा.गांधी का कहना है कि जब तक मरीज उनके पास इलाज के लिए पहुंचा, तब तक कैंसर होंठ के ऊपर व नीचे के किनारे के हिस्से तक पहुंच चुका था।

काफी जांच पड़ताल के बाद रेडियोथेरेपी तकनीक करने का निर्णय लिया गया, परन्तु ली-नैक तकनीक से सिकाई करने से मरीज के चेहरे, गर्दन समेत दूसरे अंगों को रेडिएशन का नुकसान हो रहा था। इसके बाद सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर ब्रोकीथेरेपी करने का निर्णय लिया गया। मरीज को एनेस्थीसिया देने के बाद ब्रोकीथेरेपी के महीन कैथेटर मरीज के कैंसर वाले हिस्से में लगाए गए। उन्होंने बताया कि लगभग छह कैथेटर महीन तार की तरह होंठ में लगाए गये। अगले दिन कैथेटर के एक हिस्से को मशीन से जोड़ने के बाद थेरेपी देकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया गया। इस तकनीक से ब्रोकीथेरेपी से कैंसर कोशिकाओं पर टारगेटेड अटैक हो गया, लेकिन स्वस्थ्य कोशिकाओं नष्ट नहीं हो पायी। डा. अजीत ने बताया कि अभी तक होंठ के कैंसर की सर्जरी ही जाती थी। सर्जरी के बाद होंठ को पुरानी तरह ले आते थे,लेकिन मरीज को बोलने में परेशानी होती थी। चेहरे की सुंदरता भी प्रभावित होती थी, लेकिन ब्रोकीथेरेपी से आस-पास के अंगों को नुकसान नहीं होता है।

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