देश के सातवें स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना

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लखनऊ। अंगदान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एसजीपीजीआई में देश के सातवें स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना की है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का कोई अंग खराब हो गया है, तो उसकी जान बचाने के लिए एक स्वस्थ व्यक्ति से अंग व ऊतक लिए जाते हैं। एक डोनर से मिलने वाले अंग और ऊतक लगभग 50 बीमार लोगों की जान बचा सकते हैं। जन जागरूकता कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल माध्यम से प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अंगदान का कार्य सभी कार्यों से उत्कृष्ट कार्य है। वही प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने भी लोगों से अपील की कि लोगों को धर्म और जाति से ऊपर उठकर अंग दान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंगदान मानवता के प्रति सच्ची सेवा है।
बताते चले कि 27 नवम्बर को पूरे देश में 11 वां अंगदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर पीजीआई में जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसका विषय लोगों में अंगदान के विषय में जन जागरूकता फैलाना। इस दौरान विशेषज्ञों ने लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बताया कि अंगदान को लेकर लोगों में कई भ्रांतियां हैं। लोगों में अभी भी जन जागरूकता का अभाव है। जिसके चलते लोगों में अंगदान को लेकर भय व्याप्त रहता है।
एसजीपीजीआई में जन जागरूकता कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल माध्यम से प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अंगदान का कार्य सभी कार्यों से उत्कृष्ट कार्य है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने लोगों को कौन अंग दान कर सकता है और एक आर्गन डोनर कैसे बन सकते हैं। इसके बारे में भी समझाया।
कार्यक्रम के अवसर पर एसजी पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर राधाकृष्ण धीमन, अस्पताल प्रशासन केविभागाध्यक्ष तथा स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के नोडल ऑफिसर डॉ हर्षवर्धन मौजूद रहे। डॉ हर्षवर्धन के मुताबिक किसी भी धर्म आयु तथा वर्ग का व्यक्ति अंगदान कर सकता है। दान किए जाने वाले अंग और ऊतकों के बारे में उन्होंने बताया कि गुर्दे ह्रदय, लिवर, पेनक्रियाज आंते और फेफड़े ,त्वचा, अस्थि,अस्थि मज्जा आदि डोनेट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आज डोनर सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया था।

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