लखनऊ। फेफड़े की जटिल बीमारी का शुरू में ही पता लगाया जा सकेगा। बीमारी कितनी जटिल हो सकती है। इसका भी जल्दी पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए पीजीआई परिसर स्थित सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च केंद्र (सीबीएमआर) विशेष उपकरण तैयार कर रहा है। वैज्ञानिक डाक्टरों ने जल्द ही उपकरण तैयार हो जाने का दावा किया है। यह जानकारी केंद्र के निदेशक डॉ. आरके धवन ने दी। वह शुक्रवार को केंद्र के 17 वां स्थापना दिवस समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि इलाज की पुरानी पद्धति को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से जोड़ने की जरूरत है। पुराने ज्ञान को बनाए रखने के लिए केंद्र को काम करना होगा।
डॉ. धवन ने कहा कि फेफड़े की बीमारी व उसकी गंभीरता की जानकारी के लिए केंद्र दो उपकरण बना रहा है। रिसर्च के बाद यह उपकरण वर्ष के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। फिर आईसीएमआर उपकरणों को मानकों पर परखेगा। इसके बाद इसका प्रयोग मरीजों पर किया जा सकेगा। केंद्र को संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही केंद्र में छह नए विभाग की स्थापना की जाएगी। इसके लिए प्रयास किया जा रहा हैं। डॉ. आरके धवन ने बताया कि अब पूरे प्रदेश के संस्थानों के मेडिकोज और वैज्ञानिक यहां रिसर्च कर सकते है। यहां रिसर्च में प्रयोग होने वाले 25 से अधिक ज्यादा उपकरण हैं। परन्तु मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा एवं प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार के अनुमति के बाद केंद्र पूरे प्रदेश के लिए खोल दिया गया। शोध कर्ता को अपने संस्थान से निर्देश पत्र लेकर केंद्र आकर शोध कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें यूजर चार्ज देना होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र का सीडीआरआई से समझौता हुआ है। उसके माध्यम से दवा के मॉलीक्यूल तैयार कर रहे हैं।
मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि इलाज की पुरानी पद्धति को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से जोड़ने की जरूरत है। पुराने ज्ञान को बनाए रखने के लिए केंद्र को काम करना होगा।