लखनऊ। किग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों को एक समान दाम में सस्ती दवाएं मिलना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है, फिलहाल केजीएमयू प्रशासन ने भी एक हाई पावर कमेटी का गठन कर दिया है, ताकि मरीजों को दवाएं सस्ती मिल सके। यह कमेटी 20 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट के बाद दवाओं की कीमतें बदली जा सकती हैं।
केजीएमयू में वेलफेयर, एचआरएफ व अमृत फार्मेसी से मरीजों को दवा खरीदनी पड़ती है या फिर यहां पर मौजूद न होने पर बाहर स्थित दवा की दुकानों से दवा खरीदी जाती है। एचआरएफ में मरीजों को दवाएं कम शुल्क में मिल रही है। यहां पर पीजीआई व लोहिया संस्थान की तरह दवाएं दी जा रही है।
प्रवक्ता डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि मरीजों को सस्ती व क्वालिटी दवाएं मिल सकेंगे, इसके लिए केजीएमयू प्रशासन कोशिश कर रहा है। मरीजों के हित में आमा मेडिकल स्टोर को टेंडर के माध्यम से आवंटित किया गया, जो 26 प्रतिशत की छूट के साथ दवाएं मरीजों को उपलब्ध करा रहा। केजीएमयू वेलफेयर सोसाइटी का गठन किया गया। सोसाइटी के माध्यम से गरीब मरीजों, छात्रों व विवि कर्मचारियों को सस्ती दर पर दवाएं मुहैया करा रही है। सोसाइटी ने दवाओं के दामों पर अधिकतम 41 फीसदी तक रियायत दी। भारत सरकार की अमृत योजना के तहत भी सरकार की दरों पर मरीजों को सस्ते दर पर दवाएं उपलब्ध कराने का कार्य हो रहा है।
इसी प्रकार जन औषधि केंद्र भी सरकार की योजना है, जिसके माध्यम से भी सस्ती दरों पर दवाइयां उपलब्ध करायी जा रही हैं। एचआरएफ की योजना को भी शुरू किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ट्रॉमा सेंटर में पूर्व से ही संचालित है और 27 अगस्त से गांधी वार्ड में भी शुरू हो रहंा है। इसमें पीजीआई के दरों पर ही दवाएं उपलब्ध हैं। आने वाले समय में सोसायटी का स्थान एचआरएफ द्वारा ले लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फिर भी दवा के दाम में अंतर को देखते हुए हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी मरीजों को न्यूनतम दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के उठाए जाने वाले कदमों की संस्तुति करेगी।
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