दुनियां की तीन महत्वपूर्ण भाषाओं में हिन्दी भी शामिल

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लखनऊ । अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य सचिव डा. शम्भू नाथ ने कहा कि सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए। हिन्दी भाषा में साहित्य में बहुत काम हुआ, लेकिन विज्ञान व तकनीक क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। उन सभी भाषाओं का जिसके द्वारा हम आत्म अभिव्यक्ति करते हैं, उनको नमन करने का दिन है। उन्होंन कहा कि हिन्दी साहित्य ने समाज को जगाने का कार्य किया है। सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने हिन्दी को सम्मान देते हुए आजादी की लड़ाई लड़ी। आज दुनियां की तीन महत्वपूर्ण भाषाओं में हिन्दी है। हमें खिचड़ी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। दुनियां आज हमसे जुड़ने के लिए हिन्दी की पढ़ाई कर रही है। हिन्दी को सहित्य से निकाल कर इसे वैज्ञानिक भाषा बनाना पड़ेगा, तब जाकर हिन्दी का आैर उन्नति हो सकेगी।

मुख्य वक्ता डा. अमिता दुबे ने बताया कि आज मातृभाषा दिवस है जिसे हम अंतर राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाते हैं। इसका इतिहास एक दुख के साथ जुड़ा हुआ है। 21 फरवरी 1952 को जब बांग्लादेश पूर्व पकित्सतान के रूप में जाना जाता था तब ढाका विश्वविद्यालय, जगन्नाथ कालेज आैर ढाका मेडिकल कालेज कॉलेज के छात्रों नेे बांग्ला भाषा की अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राण की आहूती दी। जहां पर यह घटना हुई थी वहां पर एक स्मारक बना आैर उसे मातृभाषा स्मारक के नाम से जाना जाता है। यह घटना 21 फरवरी को हुई थी इसलिए इसे मातृदिवस भाषा के रूप में मानाने की परम्परा शुरू हुई। 17 नवम्बर 1999 को यूनेस्को ने 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की संज्ञा प्रदान की गई। पहला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2000 मे मनाया गया।

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2008 मे अंतर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष मनाया गया। उन्होंने देश में मातृभाष के प्रति लगाव जन्म से ही है क्योंकि हमारे संस्कारों में मातृभाषा है। एक कहावत कही जाती है कि ‘कोस-कोस पर पानी बदले, तीन कोस पर बाणी।” 234 बोलियां बोली जाती हैं। गोष्ठी में इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. विनोद जैन, अधिष्ठाता पैरामेडिकल संकाय प्रो. पुनीता मनिक, पल्मोनरी विभाग के अध्यक्ष डा. सूर्यकांत ने भी विचार व्यक्त किये।

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